4. पीड़ित लोगों के प्रति सरकार का कर्तव्य - Page 57

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

क्षेत्रों में भी, विशेषतया सेना के क्षेत्र में, घुसपैठ की। ईस्ट इंडिया कंपनी की पूरी सेना में दलित वर्गों के लोग थे। वास्तव में दलित वर्गों की सेना की ब्रिटिश शासन को सहायता मिली, अन्यथा ब्रिटिश शासन को भारत पर विजय पाना कठिन था। सन् 1892 तक सेना में अछूत भर्ती होते रहे। यकायक 1892 में सेना में अछूतों की भर्ती बंद कर दी गई तथा वे शोचनीय स्थिति में छोड़ दिये गए, जब उनकी कोई शिक्षा नहीं थी और सम्मानीय जीवन बिताने के लिए कोई मार्ग भी नहीं थे।

  1. इन अनुसूचित जातियों को उस संकट से कौन उभार सकता है जिनसे वे अब घिरी हुई है? यह निश्चित है कि वे लोग अपने प्रयत्न से अपनी दशा नहीं सुधार सकते। उनके साधन बहुत कम है, अतः वे स्वयं प्रगति नहीं कर सकते। वे हिन्दुओं की दानशीलता पर भी निर्भर नहीं कर सकते। हिन्दुओं की दानशीलता का प्रश्न भी नहीं उठता, हिन्दू अपने कार्यक्षेत्र में सम्प्रदाय-पोषक हैं और उनकी दानशीलता का लाभ वे ही लोग उठा सकते हैं जो दानदाता के समुदाय के है। हिन्दू दानदाता या तो व्यापारी हैं या उच्च जाति के लोग हैं। दुःख इस बात का है कि हिन्दू आम जनता से धन एकत्र करते हैं, परंतु जब दान करने का प्रश्न उठता है तब वे जनता को भूल जाते हैं और केवल अपनी जाति और समुदाय को ही याद रख पाते हैंं। अनुसूचित जातियों को ये साधन उपलब्ध नहीं है तथा वे उस दान की राशि से भी वंचित कर दिए जाते हैं जिसे दोनों ने एकत्र किया है। इसलिए उनके लिए केवल एक ही स्रोत शेष रह जाता है जिसका संबंध उस वित्तीय सहायता से है जो उन्हें सरकार द्वारा मिल सकती है। मैं यह कहने का साहस करता हूं कि यह केन्द्रीय सरकार का कर्तव्य है कि वह ऐसे लोगों की रक्षा करें जिनका संकट अपनी किसी भूल के कारण पैदा नहीं हुआ। सरकार अनुसूचित जातियों की सहायता करने के लिए कदम उठा सकती है ताकि अनुसूचित जातियां अपने न्यायसंगत दावों को स्वीकार करा सकें और अपने प्रतियोगिता के साथ समान शर्तो पर प्रतियोगिता कर सकें। यह कोई असाधारण बात नहीं है कि केन्द्रीय सरकार से यह कहा जाए कि अनुसूचित जातियों की दशा सुधारने के लिए विशेष ध्यान दिया जाए। उन व्यक्तियों को यह सोचना चाहिए कि भारत सरकार ने एंग्लो-इंडियन समुदाय के कल्याण की सुरक्षा के लिए जो कुछ किया है वह अनुसूचित जातियों के लिए भी किया जाए। मैं उनमें से कुछ का जिक्र करूंगा।

(1) अधिक वेतन

एक समय था जब एंग्लो-इंडियन को भारतीय से अधिक वेतन मिला करता था। एंग्लो-इंडियन और भारतीय वेतन का अंतर नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट हो