सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार
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इन प्रस्तावों की भर्त्सना की जिसका मुख्य आधार यह था कि इन प्रस्तावों के कारण भारत का विभाजन हो जाएगा।
मुसलमानों द्वारा सार्वजनिक रूप से घोषणएं नहीं की गई है। परंतु अधिकांश मुस्लिम समाचार-पत्रों से यह लगता है कि वे इन विचार-विमर्श के परिणाम से संतुष्ट थे जिसका आधार था, सर्वप्रथम, कि उनको नीचा नही दिखाया गया था जैसे कि उन्हें आश्ांका थी, और दूसरे, यह विचार-विमर्श इस बात के लिए असफल नहीं हो सकता था कि इसने ब्रिटिश सरकार की आंखें इस तथ्य के प्रति खोल दी थी कि यह कांगेस का दुराग्रह है जो वास्तविक बाधा है। मुझे बताया गया कि पारसी लोगों को सामान्य रूप से राहत मिली कि कुछ समय के लिए किसी भी हालत में कांग्रेस को शासन सत्ता नहीं मिलेगी।
जिस अपवाद की ओर मैने संकेत किया है, वह अम्बेडकर हैं। वह मुझसे राष्ट्रीय युद्ध मोर्चे की स्थापना के बारे में विचार-विमर्श के लिए आए और उन्होंने बिना किसी उत्साह के कुछ समर्थन देने की सहमति प्रदान की। परंतु उन्होंने घोषणा के मसौदे के बारे में कटुभाव व्यक्त करने के अवसर का लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जतला दिया गया था कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग ही ऐसे दल थे जो माने जाते थे और यदि वे दोनों इन प्रस्तावों पर सहमत हो जाएं तो इसमें कोई अंतर नहीं पड़ेगा कि दलित वर्ग क्या सोचते हैं। उन्होंने अपमानित महसूस किए जाने की बात कही कि इन प्रस्तावों में अगस्त-घोषणा को नहीं माना गया है। आयरिश संधि का उदाहरण देकर उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव अल्संख्यकों की सुरक्षा की दृष्टि से उपहास मात्र है। उन्होंने पूछा कि यह कैसे हो सकता है और वह और उनके मित्र सरकार को अपना समर्थन कैसे दे सकते हैं यदि उनका इस प्रकार अपमान किया जाता है? उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा परिषद् से त्याग-पत्र देने का विचार व्यक्त किया, परंतु कुछ समय के लिए बने रहने का निर्णय किया। उनसे यह आशा नहीं की जा सकी कि सरकार का समर्थन देने का उत्साह दिखा सकें। मैने उनसे तर्क किया, जैसा तर्क करने की क्षमता मैं रखता था, परंतु मुझे आशंका है कि इससे उन पर कोई विशेष प्रस्ताव नहीं पड़ा। अम्बेडकर में असंतोष की भावना काफी समय तक बनी रही और वास्तव में यह भावना उनके मन में तभी से बनी हुई है जब से उन्हें कार्यकारी परिषद् में नहीं लिया गया। मुझे आशा है कि वह इस प्रान्त में अपने अनुयायियों से अपने विचारों का समर्थन पा सकेंगे क्योंकि वह उनमें केवल एक व्यक्ति हैं जो उनके मुद्दों के बारे में सोचने में समर्थ हैं।
मैं पूर्णतया आश्वस्त हूं कि उनकी असंतोष-भावना मुख्यतः व्यक्तित्व का मामला है। जैसा कि आप जानते हैं, उनकी निजी आर्थिक स्थिति उनके लिए कुछ समय से