54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
(1) ब्रिटिश भारत का कोई ऐसा प्रांत जो उक्त संविधान को स्वीकार
न कर अपनी वर्तमान संवैधानिक स्थिति बनाए रखना चाहता है तो
यह उसका अधिकार होगा, परंतु यह भी प्रावधान किया जायेगा
कि बाद में कभी वह अन्य ऐसे प्रांतों के साथ जो विलय नहीं
हुए है, विलय होने का निर्णय लें तो उसे इसकी छूट होगी। वे
प्रांत यदि चाहे तो महामहिम की सरकार ऐसे नए संविधान पर
सहमति के लिए तैयार होगी जो उन्हें भारतीय संघ के समान
ही पूर्ण औहदा प्राप्त कराए और जो यहां उल्लिखित प्रक्रिया
के अनुसार ही बनाया गया हो।
(2) महामहिम की सरकार तथा संविधान-निर्माण सभा के बीच वार्ता द्वारा
की गयी संधि पर हस्ताक्षर। इस संधि में वे सभी आवश्यक मुद्दे
सम्मिलित किए जाएंगे जो ब्रिटिश द्वारा भारतीयों को उत्तरदायित्व
हस्तांतरित किए जाने से संबंधित हैं, इसमें ऐसे प्रावधान रखे जायेंगे
जो महामहिम की सरकार द्वारा जातीय तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों
के संरक्षण के लिए दिए गये वचनों के अनुसार होंगे, परंतु इसमें
भारत संघ के अधिकारों पर कोई ऐसे प्रतिबंध आरोपित नहीं किए
जायेंगे जिनसे ब्रिटिश कामनवेल्थ के अन्य सदस्य देशों के साथ
भारत संघ के संबंधों पर कोई प्रभाव पड़ता हो। भले कोई भारतीय
रियासत संविधान को अंगीकार करे या न करे, नई परिस्थिति की
मांग के अनुसार उसके लिए अपनी संधि की व्यवस्थाओं में परिवर्तन
के लिए बातचीत करना आवश्यक होगा।
(घ) संविधान-निर्माण सभा का गठन निम्न प्रकार से होगा, जब तक कि भारत के मुख्य सम्प्रदायों के नेता, युद्ध समाप्त होने से पूर्व, किसी अन्य प्रकार पर सहमत न हों। युद्ध समाप्ति के बाद होने वाले प्रांतीय चुनावों के परिणाम आने के तुंरत बाद, प्रांतीय विधान सभाएं एकल निर्वाचन पद्धति द्वारा संविधान-निर्माण सभा का निर्वाचन आनुपातिक पद्धति से करेगी। संख्या में यह नयी सभा निर्वाचन कॉलेजों की संख्या का दसवां भाग होगी। भारतीय रियासतों को उनकी कुल जनसंख्या के अनुसार उसी अनुपात में अपने प्रतिनिधि नियुक्त करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा जैसा कि कुल मिलाकर ब्रिटिश इंडिया के प्रतिनिधियों के मामले में है और उसकी वे ही शक्तियां होंगी जो कि ब्रिटिश भारतीय सदस्यों की होंगी।
(ड.) भारत के सम्मुख इस समय जो नाजुक घड़ी है उसके दौरान और जब तक नया संविधान बनाया नहीं जाता तब तक, महामहिम की सरकार को