5. क्रिप्स प्रस्तावों पर डा. अम्बेडकर का वक्तव्य - Page 71

56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

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ऽक्रिप्स प्रस्तावों पर डॉ. अम्बेडकर का वक्तव्य

डॉ. बी.आर.अम्बेडकर, विधान सभा सदस्य, दलित वर्गो के नेता, ने अपने एक प्रेस वक्तव्य में कहाः-

‘‘युद्ध मंत्रिमंडल के प्रस्ताव महामहिम की सरकार के दृष्टिकोण में एकाएक परिवर्तन प्रदर्शित करते है। ये प्रस्ताव, जिनकी उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला कह कर भर्त्सना की थी, ताकत के आगे उनका आत्मसमर्पण दर्शातें हैं। यह म्युनिख मानसिकता है जिसका सार यह है कि अन्य व्यक्तियों की बलि चढ़ा कर अपने को बचा लिया जाए और यह ऐसी मानसिकता है जो इन प्रस्तावों में पूरी तरह झलकती है। यह कहा गया है कि अमरीकी और अंग्रेज इस कारण भारतीयों से नाराज हैं कि उन्होंने इन प्रस्तावों का स्वागत नहीं किया जिनका संबंध भारत की संवैधानिक उन्नति से है और इस प्रकार सर स्टफोर्ड क्रिप्स के मिशन को असफल कर दिया। अमरीकनों की प्रवृत्ति को तो क्षमा किया जा सकता है, परन्तु निश्चय ही अंग्रेजों और सर स्टफोर्ड क्रिप्स की जानकारी कुछ अधिक होनी चाहिए। ऐसा नहीं लगता कि पर्याप्त रूप से यह बात महसूस की गयी है कि महामहिम सरकार के ये प्रस्ताव जो सर्वोत्तम बताए जाकर अब प्रस्तुत किए गए हैं वे ही प्रस्ताव हैं जिन्हें महामहिम की सरकार में कुछ महीने पूर्व सबसे निष्कृष्ट बताकर रद्द किया था और उनकी भर्त्सना की थी। जो लोग यह महसूस करते हैं, वे ये अवश्य कहेंगे कि संवैधानिक प्रगति के कार्य का यह सबसे भद्दा भाग है जिसे महामहिम की सरकार अब प्रारंभ करने की जल्दी में है।

इन प्रस्तावों को तीन भागों में बांटा गया हैः-

(1) एक संविधान सभा गठित की जायेगी जिसको भारत के संविधान की रचना

का अधिकार होगा। इस सभा को, बहुसंख्यक निर्णय के अनुसार संविधान

की रचना का पूर्ण अधिकार होगा।

ऽ दलित वर्ग के सम्मेलनों की रिपोर्ट, जो नागपुर सत्र में 18, 19 और 20 जुलाई, 1942 को आयोजित

किए गए थे। पृ. 100-06