5. क्रिप्स प्रस्तावों पर डा. अम्बेडकर का वक्तव्य - Page 73

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

करेंगे जो उन्हें एक पृथक अस्तित्व मानेगा और जिसमें वे एक सांख्यिक बहुमत

सेनहीं हांके जायेंगे। यही बात उस विशाल समूह पर लागू होती है जिसे अनुसूचित

जातियों के नाम से जाना जाता है। ये अनुसूचित जातियां यह महसूस करती हैं कि

यद्यपि श्री गांधी ने उनकी ओर से बहुत निष्ठापूर्वक प्रयास किए है, तथापि इसके

बाबजूद समुदाय के रूप में वे उस हिंदू समुदाय की मुख्य धारा से बाहर हैं जिनका

कांग्रेस द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है। यह वक्तव्य श्री एमेरी द्वारा किया गया जब

वे 8 अगस्त, 1940 को वायसराय की घोषणा की व्याख्या कर रहे थे। इस घोषणा

में अल्पसंख्यकों के लिए महामहिम की ओर से वाइसराय द्वारा यह वादा किया गया

थाः ‘‘दो मुख्य बातें हैं जो उभरी हैं। इन दो बातों के बारे में महामहिम की सरकार

ने मुझसे यह कहा है कि सरकार की स्थिति को स्पष्ट किया जाए। सर्वप्रथम बात

किसी भी भावी संवैधानिक योजना के संबंध में अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में

है........ यह बताने की आवश्यकता नहीं कि महामहिम की सरकार भारत की शांति

और कल्याण को ध्यान में रखते हुए, किसी भी ऐसी सरकारी पद्धति को अपने

वर्तमान दायित्वों को हस्तांतरण नहीं कर सकती जिसकी सत्ता को भारत के राष्ट्रीय

जीवन के वृहद और सशक्त तत्वों को अस्वीकार कर दिया है और न ही महामहिम

की सरकार उन तत्वों पर यह दबाव डालेगी कि ऐसी सरकार की सत्ता वे स्वीकार

कर लें। 23 अप्रैल, 1941 को फिर श्री एमेरी ने संविधान सभा की मांग की बात

उठाई और अपनी अभिव्यक्ति आगे दिए गए शब्दों में कीः

‘‘भारत का भावी संविधान भारतीयों द्वारा अपने लिए बनाया जाना चाहिए और

इस संविधान को ब्रिटिश सरकार द्वारा नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत का भावी

संविधान आवश्यक रूप से भारतीय संविधान होना चाहिए और इस संविधान की

रचना भारतीय परिस्थितियों और भारतीय आवश्यकताओं की भारतीय संकल्पना के

अनुसार की जानी चाहिए। केवल आवश्यक शर्त यह है कि संविधान स्वयं और वह

निकाय जो इस संविधान की रचना करें, भारत के राष्ट्रीय जीवन के प्रमुख तत्वों

के बीच हुए समझौते के परिणामस्वरूप होने चाहिए।’’

महामहिम की सरकार द्वारा संविधान सभा के बारे में किए गये वादे और व्यक्त विचार ये थे- ऐसी संविधान सभा के बारे में जिसे अब मान लिया गया है। पाकिस्तान की मांग मुस्लिम लीग ने की थी। यह मांग भी महामहिम सरकार द्वारा रद्द कर दी गई। इस बारे में जो श्री एमेरी ने 1 अगस्त, 1940 को हाउस ऑफ कामन्स में कहा वह इस प्रकार हैः

‘‘कांग्रेस राज या तथाकथित हिंदू राज के खतरों के विरूद्ध प्रतिक्रिया ऐसी हुई

कि मुसलमानों ने यह बलवती मांग की कि भारत को अलग-अलग हिंदू और