5. क्रिप्स प्रस्तावों पर डा. अम्बेडकर का वक्तव्य - Page 77

62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

है, इसे सरलता से देखा जा सकता है यदि कोई उन मांगों की तुलना करे जो कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने की हैं और इन प्रस्तावों द्वारा उन्हें रियायतें दी गयी हैं। कांग्रेस ने यह मांग की थी कि संविधान सभा द्वारा संविधान बनाया जाना चाहिए। परंतु कांग्रेस ने यह नहीं मांगा था कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का प्रश्न संविधान सभा द्वारा केवल बहुसंख्यक मत के आधार पर निर्णीत किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, जब वायसराय ने यह घोषणा की कि ब्रिटिश सरकार कांग्रेस की मांग में निहित अल्पसंख्यकों को दबाने में भागी नहीं बनेगी, तो कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति ने 22 अगस्त, 1940 को आयोजित वर्धा की बैठक में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित कियाः

‘‘समिति को इस बात का खेद है कि यद्यपि कांग्रेस ने कभी भी नहीं सोचा था कि अल्पसंख्यकों को दबाया जाए और ब्रिटिश सरकार से ऐसा करने के लिए कभी नहीं कहा, फिर भी ऐसे संविधान के समझौते की मांग का जो उचित रूप से निर्वाचित संविधान सभा के प्रतिनिधियों द्वारा तैयार किया जाता, गलत अर्थ लगाकर कि इससे अल्पसंख्यकों को दबाया जा सकता है, प्रगति के लिए भारी अवरोध पैदा कर दिया गया है।’’ कार्यकारिणी समिति ने कहाः- ‘‘कांग्रेस ने यह प्रस्ताव किया है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों को संबंधित अल्पसंख्यकों के चुने गए प्रतिनिधियों के साथ समझौता करके पर्याप्त रूप से सुरक्षित किया जाना चाहिए।’’

इससे यह प्रकट होता है कि कांग्रेस तक ने भी यह मांग नहीं की कि अल्संख्यकों के अधिकारों का निर्णय संविधान सभा के कार्यक्षेत्र में सम्मिलित किया जाना चाहिए। महामहिम की सरकार ने कांग्रेस को न केवल वह दिया जो उसने नहीं मांगा था, परंतु उसे वह अतिरिक्त अधिकार भी दिया जिससे वह केवल बहुमत द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात का निर्णय कर सके। पाकिस्तान के प्रश्न के संबंध में इसी प्रकार की प्रवृत्ति दृष्टव्य है। मुस्लिम लीग ने इस बात की मांग नहीं की थी कि तत्काल पाकिस्तान की स्वीकृति दी जाए। मुस्लिम लीग ने यही मांगा था कि संविधान के आगामी संशोधन में मुसलमानों को पाकिस्तान के प्रश्न को उठाने से न रोका जाए। वर्तमान प्रस्तावों में यह बात बढ़-चढ़कर कही गयी है और मुस्लिम लीग को स्पष्ट रूप से पाकिस्तान बनाने का अधिकार दिया गया है। ये संवैधानिक प्रस्ताव हैं। ये ऐसे प्रस्ताव हैं जिनके द्वारा भारत को एक बड़े गृह युद्ध में ढकेल दिया जायेगा जिसमें हिन्दुओं, मुसलमानों, दलित वर्गो और सिखों में जमकर घमासान होगा। फिर भी सर स्टफोर्ड क्रिप्स महामहिम की सरकार से अनुमति लेकर अथवा अनुमति लिए बिना बड़े दलों और लघु दलों के बीच भेदभाव करते रहे। बड़े दल वे हैं जिनकी अनुमति आवश्यक है। लघु दल वे हैं जिनसे परामर्श करना ही पर्याप्त समझा जाता है। यह नया भेद है। वास्तव में यह पहले महामहिम की सरकार या वायसराय द्वारा की गई घोषणाओं में नहीं था। इस घोषणा में ‘‘भारत के राष्ट्रीय जीवन के प्रमुख तत्वों की