66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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युद्ध मंत्रिमंडल आलेख डब्ल्यू.पी (42) 283
एल/पी और जे/8/510ः एफएफ 407-16
6 जुलाई, 1942
भारत मिशन पर रिपोर्ट
ऽलार्ड प्रीवी सील द्वारा ज्ञापन
मेरे विचार में यह वांछनीय है कि सरकारी रिकार्ड के लिए तथा भविष्य में भारत के इसी प्रकार के मिशन की सहायता के लिए मैं उस विचार-विमर्श का ब्यौरेवार लेखा-जोखा प्रस्तुत करूं जो हाल ही में मेरी भारत यात्रा के दौरान भारतीय नेताओं के साथ हुआ था।
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ऽऽ(च) दलित वर्ग
मैंने 30 मार्च को दलित वर्गों के नेता डॉक्टर अम्बेडकर और श्री राजा से भेंट की। उन्होंने यह बताया कि पूना पेक्ट [@] द्वारा आरोपित प्रान्तीय विधान सभाओं में दलित वर्गों
ऽद ट्रान्सफर ऑफ पॉवर, खंड 2, संख्या 227, पृष्ठ 336-37
ऽऽ द ट्रान्सफर ऑफ पॉवर, खंड 2, संख्या 227, पृष्ठ 336-37 डॉक्टर अम्बेडकर से ही संबंधित अंश को
यहां दिया गया है-संपादक
@ हिन्दू और दलित वर्ग के नेताओं के बीच पूना पेक्ट में 4 अगस्त, 1932 (देखिए नोट II ) के कम्यूनल
एवार्ड को संशोधित किया। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थेः 71 सीटों के स्थान पर 148 सीटें दलित
वर्गो के लिए आरक्षित की जानी थी परंतु उन्हें प्रतिनिधियों का चुनाव संयुक्त रूप से सवर्ण हिन्दू और
दलित वर्ग के मतदाताओं द्वारा किया जाना था_ फिर भी संयुक्त निर्वाचन मंडल का चुनाव उन चार
उम्मीदवारों के पैनल तक ही सीमित रखा गया था जिनका कि प्राथमिक चुनाव में चयन कर लिया गया
था और जिसमें केवल दलित वर्ग के मतदाता ही भाग ले सकते थे। यह पेक्ट गांधी जी के दबाव से
किया गया था (उस समय गांधी जी पूना की जेल में थे)। गांधी जी ने दलित वर्गो को हिन्दू समुदाय
का सदस्य माना था तथा उनके लिए अलग निर्वाचन-क्षेत्र का विरोध किया था। उन्होंने आमरण अनशन
(20 सितम्बर से प्रारंभ) की धमकी दी यदि उनकी आपत्तियों के अनुकूल कम्यूनल एवार्ड में परिवर्तन
नहीं किया गया। इस एैक्ट पर 24 सितम्बर को निर्णय किया गया तथा महामहिम सरकार की सहमति
26 सितम्बर, 1932 को घोषित की गई।