74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
किसी सदस्य को भी संदेह नहीं है, कि यदि आप अनुसूचित जातियों की शिकायतों को जान जाएं तो आप उन्हें ठीक करने में कभी भी नहीं झिझकेंगे। इसी विचार के दृष्टिकोण से मैं कहता हूं कि मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि मैं ऐसी व्यक्ति से अनुसूचित जातियों के लिए न्याय चाहता हूं जो उनके लिए न्याय की आवश्यकता को समझाते है। मैं जानता हूं कि आप में ऐसा करने की इच्छा शक्ति है और आप इस काम को पूरा करने के लिए अपने उत्तराधिकारी पर नहीं छोड़ेंगे जिसे आप स्वयं करना चाहते हैं और जिसे आप कर सकते हैं। मुझे यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि आपके इस न्यायपूर्ण कार्य करने के लिए मैं स्वयं और अनुसूचित जातियों के 5 करोड़ लोग आपके सदैव आभारी रहेंगे।ऽ
भवदीय
बी.आर. अम्बेडकर
ऽ डॉक्टर अम्बेडकर ने लार्ड लिनलिथगो को 8 जनवरी, 1943 के पत्र के साथ एक और भी ज्ञापन
प्रस्तुत किया जिसमें उन्होंने बताया कि दलित वर्गो की दृष्टि से संविधान सभा के विरूद्ध तर्क इस
ज्ञापन में दिया गया है और ऐसे प्रश्न उठाए हैं जिनके बारे में दलित वर्गो ने उनसे यह चाहा है कि
सेक्रेटरी ऑफ स्टेट से आश्वासन प्राप्त किया जाए। एमएसएस ईयूआरएफ 125/125 देखिए संख्या 336
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