76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
परिषद् का समुदायवार गठन तय किया जाना चाहिए और भारतीय स्वयं इस बात को सुनिश्चित करें। कांग्रेस ने इस समस्या की अनदेखी कर दी है_ उसमें समाधान करने की इच्छा शक्ति नहीं है। उनका सुझाव यह था कि क्रिप्स के प्रस्तावों को एक आधार के रूप में स्वीकार किया जाए तथा उन्हें ऐसी राष्ट्रीय सरकार के आधार पर देखा जाए जिसमें कांग्रेस, मुस्लिम लीग, दलित वर्ग, सिख और ईसाइयों के प्रतिनिधि सम्मिलित हों। परिषद् के भारतीय सदस्य एक साथ बैठें और साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व की योजना तैयार करें। यद्यपि उन्होंने सुदूर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की अपेक्षा तानाशाह वायसराय को ज्यादा पसंद किया, तथापि वह सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की शक्तियों में हस्तक्षेप करने के लिए दबाव नहीं डालेंगे।