13. डॉ. अम्बेडकर का फील्ड मार्शल वाइकाउंट वेवल को पत्र - Page 96

सत्ता हस्तान्तरण संबंधी महत्वपूर्ण पत्र-व्यवहार

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अछूत कुछ समय से अपने राजनीतिक अधिकारों की पूर्ण मान्यता के लिए लालायित हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि वे महामहिम के निर्णय से स्तब्ध रह जाएंगे। और मुझे आश्चर्य नहीं होगा यदि सभी अनुसूचित जातियां इसके विरोध में निर्णय लें कि उन्हें नई सरकार से कुछ लेना-देना नहीं है। मेरा विश्वास है कि उनका भ्रम हटने पर रास्ते अलग-अलग हो जाएंगे। यही ऐसी बात है जिसका मैं अनुमान करता हूं कि महामहिम के प्रस्तावों का परिणाम होगा, यदि उन प्रस्तावों को संशोधित न किया गया। जहां तक मेरी बात है, मैंने अपना निर्णय कर लिया है। मुझसे यह कहा जाएगा कि यह इसका अंतिम रूप नहीं है, कि यह एक अंतरिम समझौता है। मैं राजनीति में काफी समय से रहा हूं और यह जानता हूं कि एक बार दी गई रियायतें निहित अधिकारों में बदल जाती हैं तथा एक बार किए गए गलत समझौते किस प्रकार भावी समझौतों के लिए पूर्व दृष्टांत बन जाते हैं। इसलिए मैं इसमें अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। यदि मुझे ठीक बात के निर्णय करने की समझ है तो मेरा अनुमान है कि प्रारंभ की गई अस्थायी व्यवस्था के रूप में सीटों का विभाजन अंत में स्थायी हो जाएगा। इसके बजाय कि अंत में पछतावा करूं, मैं महसूस करता हूं कि प्रारंभ में ही इसके विरूद्ध अपनी आपत्ति दर्ज करा दूं।

हो सकता है कि महामहिम की सरकार भावी भारत की सरकार से मेरा और अनुसूचित जातियों का सफाया हो जाने की बात की पर्वाह न करे और इस देश में ब्रिटिश सरकार तथा अनुसूचित जातियों के बीच मार्गों के अलग होने के परिणामों पर उसे खेद न हो, परंतु मेरा विश्वास है कि यह उचित है कि महामहिम की सरकार को यह जानना चाहिए कि मुझे इस विषय पर क्या कहना है। इसलिए मैं आपसे निवेदन करता हूं कि महामहिम की सरकार के समक्ष मेरा यह प्रस्ताव रखा जाए कि कार्यकारी परिषद् में अनुसूचित जातियों की सीटें बढ़ा दी जाएं और यह भी कि मेरा प्रस्ताव रद्द होने पर मैं क्या कार्यवाई करूंगा।

भवदीय

बी.आर. अम्बेडकर