84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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ऽम्ांत्रिमंडल प्रतिनिधियों, फील्ड मार्शल वाइकांउट
वेवल और डाक्टर बी.आर. अम्बेडकर के बीच
शुक्रवार 5 अप्रैल, 1945 को दोपहर बारह बजे
आयोजित बैठक के लिए टिप्पणी
एल/पीएंडजे/5/337ःपृष्ठ 83-5
गोपनीय
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वे ज्ञापन पर कुछ और नहीं कहना चाहते [†] इसकी प्रतियां प्रतिनिधियों को बांट दी गई हैं जिसमें 2 अप्रैल को अखिल भारतीय अनुसूचित जातियों के संघ ने बैठक में कार्यकारी समिति द्वारा पारित प्रस्ताव का पाठ दिया था। इस ज्ञापन के पैरा 5 में उन सुरक्षाओं की सूची दी गई है जिन्हें विशेष रूप से सरकार और लोक सेवाओं में अनुसूचित जातियों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिए जाने के लिए बनाया गया था। संघ ऐसा कोई संविधान स्वीकार नहीं करेगा जिनमें ये प्रावधान शामिल नहीं किए गए हों।
पाकिस्तान के प्रश्न पर डॉक्टर अम्बेडकर ने यह संदेह प्रकट किया कि क्या सभी मुसलमान इस नए देश के बन जाने पर वस्तुतः लाभ उठा सकेंगे। इनमें से बहुत से मुसलमान हिन्दुस्तान में रह जाएंगे तथा भारत से बाहर जाने के लिए अनिच्छुक होंगे अथवा देशांतरण करने के लिए असमर्थ होंगे।
उन्होंने शंका प्रकट की कि मुसलमानों के मन में पाकिस्तान का अस्तित्व स्थायी है अथवा अस्थायी है। शायद यह अस्थायी स्थिति है। परंतु यह प्रतीक्षा करना और देखना असंभव था और मुसलमानों की मांग बढ़कर इतनी सशक्त हो गई थी कि यह
ऽ ट्रान्सफर ऑफ पॅावर, भाग 7, संख्या 58, पृष्ठ 144-47 एल/पी और में/10/50 † एल/पी एंड जे/ 10/50
‡ बी.आर.अम्बेडकर, पाकिस्तान या भारत का विभाजन, शंकर एंड कम्पनी, बम्बई (1946)