84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
प्रक्रिया विषयक नियम बनाने से संबंध रखती है। जबकि यह धारा संघीय विधान-मंडल को अपने नियम स्वयं बनाने की अनुमति प्रदान करती है, यह गवर्नर - जनरल को नियम बनाने की अनुमति देती है।
(ग) बहस को रोकने, अथवा किसी भी ऐसे विषय पर प्रश्न न पूछने देने के लिए जिसका संबंध किसी देशी राज्य से है, किसी ऐसे मामले को छोड़कर जिनके विषय में संघीय विधान-मंडल राज्य के लिए विधि बनाने में सक्षम है, जब तक कि गवर्नर - जनरल स्वविवेक से संतुष्ट न हो कि यह मामला संघीय हित अथवा ब्रिटिश प्रजातंत्र को प्रभावित करता है और उसने मामले पर बहस करने और सवाल पूछे जाने की अनुमति न दे दी हो।
(घ) रोकने के लिए -
(1) बहस अथवा किसी ऐसे विषय में संबंधित प्रश्नों का पूछा जाना, जिनका
संबंध महामहिम अथवा गवर्नर - जनरल और किसी विदेशी राज्य अथवा
राजा के मध्य आपसी संबंधों से है, और
(2) बहस, व्यय के प्राक्कलनों को छोड़कर, जो किसी आदिवासी क्षेत्र अथवा
बहिष्कृत क्षेत्र के प्रशासन से संबंध रखते हैं, उन प्रश्नों का पूछा जाना,
अथवा
(3) किसी देशी राज्य के शासक के व्यक्तिगत आचरण अथवा किसी सत्तारूढ़
परिवार के विषय में बहस अथवा प्रश्नों का पूछा जाना।
इस धारा में आगे यह भी प्रावधान है कि यदि गवर्नर - जनरल द्वारा निर्मित कोई नियम सदन द्वारा निर्मित किन्हीं नियमों क विरुद्ध हो, तो गवर्नर - जनरल द्वारा निर्मित नियम वैध होंगे।
एक अन्य धारा जो इस बिन्दु पर प्रकाश डालती है, वह धारा 40 है। यह कहती है, संघीय विधान-मंडल में संघीय न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा अपने कर्तव्य पालन के दौरान किए गए किसी कार्य के बारे में किसी भी प्रकार का वाद - विवाद नहीं किया जा सकेगा, और इसमें दिया गया है कि इस उपधारा के अंतर्गत किसी उच्च न्यायालय को सौंपा गया मामला किसी संघीकृत राज्य के न्यायालय को संदर्भित माना जाएगा, जो इस अधिनियम के खंड 9 के अधीन किसी भी उद्देश्य हेतु एक उच्च न्यायालय के रूप में प्रतिष्ठित है। अधिनियम के इस उपखंड में इसी प्रकार के प्रावधान भी दिए गए हैं, जिनका संबंध प्रांतीय विधान-मंडलों के गठन से है। धारा 84, धारा 38 की प्रतिपूरक है और प्रांतीय विधान - मंडल के किसी भी सदस्य को किसी भी देशी राज्य के शासक के व्यक्तिगत आचरण अथवा राज्य के मामले में प्रश्न पूछने से रोकती है। धारा 86, धारा 40 की प्रतिपूरक है।
अब यह सुस्पष्ट है कि एक विधान-मंडल के सामने प्रशासन के व्यवहार को प्रभावित करने के लिए जो दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण रास्ते खुले हुए हैं, वे हैं, बजट पर