संघ बनाम स्वतंत्रता
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अब हम उत्तरदायित्व के प्रश्न पर विचार करेंगे। ब्रिटिश भारत के दृष्टिकोण से अन्य दो तर्कों के मुकाबले यह अधिक निर्णयात्मक महत्व का है और इसे सावधानी से जांचना - परखना चाहिए।
इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि संघ का कुछ सीमा तक उत्तरदयित्व है। प्रश्न यह है कि उत्तरदायित्व की सीमा कितनी है और इसके क्षेत्र में जो उत्तरदायित्व हैं, वे कितने वास्तविक हैं।
हम पूछते हैं कि इस संघ में कितना उत्तरदायित्व है? धारा 9 और 11 को साथ - साथ पढ़ने से आप इस प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम हो सकते हैं। दोनों को साथ - साथ पढ़ने से उस उत्तरदायित्व के संबंध में एक विचार आपको मिलेगा। इन दोनों धाराओं के अनुसार सरकारी प्राधिकार दो भागों में विभाजित है। पहले भाग में चार विषय आते हैं : (1) प्रतिरक्षा, (2) धर्म संबंधी मामले, (3) विदेशी मामले, और (4) आदिवासी क्षेत्रों का प्रशासन। बाकी विषयों को जो संघ के कार्यकारी प्राधिकार के अंतर्गत आते हैं, अलग दूसरी सूची में रखा गया है। दोनों ही सूचियों का कार्यकारी प्राधिकार गवर्नर - जनरल में विहित है। लेकिन सरकारी प्राधिकार के मामले में उनमें एक अंतर रखा गया है। अधिनियम के अंतर्गत प्रथम सूची में आने वाले चार विषयों के संबंध में सरकारी प्राधिकार गवर्नर - जनरल के स्वविवेक पर आश्रित है। दूसरी सूची में जो शेष विषय आते हैं, उनका अधिनियम के अंतर्गत सरकारी प्राधिकार मंत्री की सलाह पर कार्यरत गवर्नर - जनरल पर छोड़ गया है। प्रथम चार विषयों के मामले में सरकार विधान-मंडल के प्रति उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि गवर्नर - जनरल जिसमें कि सरकारी प्राधिकार इन चार विषयों के बारे में विहित है, विधान-मंडल द्वारा पदच्युत नहीं किया जा सकता। अन्य सभी मामलों में सरकार विधान-मंडल के प्रति उत्तरदायी है, क्योंकि जिन मंत्रियों की सलाह पर सरकारी प्राधिकार प्रयोक्तव्य है, उन्हें विधान-मंडल द्वारा पदच्युत किया जा सकता है। इसलिए संघीय योजना में उत्तरदायित्व प्रतिरक्षा और विदेशी मामलों पर लागू नहीं होता, जो कि अंततः सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह योजना द्वैध शासन से मिलती - जुलती है, जिसमें विषयों का विभाजन आरक्षित और हस्तांतरित विषयों के रूप में, मोंटेग्यू - चेम्सफोर्ड सुधारों के आधार पर था, किया गया है जिसकी परिकल्पना भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत प्रांतीय संविधान में की गई थी। 1935 के अधिनियम में संघीय संविधान में उत्तरदायित्व की योजना, 1919 के अधिनियम के अंतर्गत प्रांतीय संविधान की यथार्थ प्रतिकृति है।
क्या यह उत्तरदायित्व वास्तविक है? मेरा उत्तर नकरात्मक है। इसके लिए मैं अपने कारण बताऊंगा। प्रथमतः, उत्तरदायित्व का क्षेत्र सीमित होने के साथ - साथ मंत्रियों द्वारा कार्यवाही करने का खुला क्षेत्र नहीं है। इस बात का अनुभव करने के लिए कि यह सीमित उत्तरदायित्व कितना बंधनमुक्त है, हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि मंत्रियों की शक्तियों पर जब वे अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हैं, कितने प्रतिबंध लगाए जाते हैं।