2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 105

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

मंत्रियों के प्राधिकार पर लागू प्रतिबंधों की प्रथम श्रृंखला गवर्नर - जनरल के अपने विशेष उत्तरदायित्व का पालन करने से उत्पन्न होती है।

मंत्रियों के प्राधिकार पर लागू प्रतिबंधों की एक अन्य श्रृंखला है, जो हस्तांतरित विषयों के संबंध में सरकारी प्राधिकार के प्रयोग से उत्पन्न होती है। इसको समझने के लिए आपको संघीय संविधान के एक विशेष लक्षण को जानना पड़ेगा। संविधान सरकारी प्राधिकार के दृष्टिगत विषयों का वर्गीकरण करता है और इस वर्गीकरण के फलस्वरूप विषयों का ऐसा विभाजन हुआ है, जिन्हें संक्षिप्तता के लिए हस्तांतरित और आरक्षित नाम दिया जा सकता है। संविधान यहीं नहीं रुकता। यह आगे बढ़कर हस्तांतरित विषयों के दो श्रेणियों में विभाजन करता है - (1) वे विषय, जिन पर मंत्रियों का सरकारी प्राधिकार अपने साथ प्रशासकीय नियंत्रण भी लाता है, और (2) वे विषय, जिन पर मंत्रियों का सरकारी प्राधिकार अपने साथ प्रशासकीय नियंत्रण नहीं लाता।

इस वर्गीकरण के उदाहरण के लिए रेलवे का मामला प्रस्तुत किया जा सकता है। रेलवे एक हस्तांतरित विषय है। मंत्रियों का सरकारी प्राधिकार रेलवे पर है। लेकिन मंत्रीगण रेलवे पर किसी भी प्रकार का प्रशासकीय नियंत्रण नहीं रख सकते। रेलवे पर प्रशासकीय नियंत्रण रेलवे प्राधिकरण का होता है। प्रशासकीय नियंत्रण सहित सरकारी प्राधिकार और बिना प्रशासकीय नियंत्रण के सरकारी प्राधिकार के मध्य जो भेद है, वह भेद बिना किसी भिन्नता के नहीं है। दूसरी ओर यह जो दोनों स्थितियों में भिन्नता है, वह वास्तविक है। धारा 181 की उप-धारा (2) में रेलवे के मामले में यह भिन्नता स्पष्ट की गई है। यह भेद नीति निर्धारित करने वाले प्राधिकार और उसकी कार्य - क्षमता के बीच है। यह इस संघ की वकालत करने वालों को बताने के लिए है कि क्या सरकारी योजना में उत्तरदायित्व की वास्तविकता है, जब कि कार्य करने में सक्षमता तथा नीति - निर्धारण के प्राधिकार में संबंध - विच्छेदन है?

संघीय योजना में उत्तरदायित्व विषयक दो बातें स्पष्ट हैं। प्रथम यह कि उत्तरदायित्व की परिधि सीमित है। दूसरे, यह वास्तविक नहीं है, क्योंकि गवर्नर - जनरल के विशेष उत्तरदायित्वों के फलस्वरूप और साथ ही मंत्रियों के सरकारी प्राधिकार को, कुछ विषयों में सक्षमता से कार्य करने, जैसे कि रेलवे, यद्यपि वे हस्तांतरित विषय हैं, वापस ले लेने के कारण इसमें रूकावटें पैदा होती हैं।

मैं पहले कह चुका हूं कि संघीय योजना में उत्तरदायित्व की प्रणाली द्वैध शासन - प्रणाली से मेल खाती है, जिसे 1919 के अधिनियम के अंतर्गत प्रांतों में लागू किया गया था। लेकिन यद्यपि संघ में उत्तरदायित्व की योजना की द्वैध शासन - प्रणाली से तुलना करने पर जिसे प्रांतों में लागू किया गया था, यह बात पता चलती है कि दूसरे के मुकाबले पहली में उत्तरदायित्व पर कम जोर दिया गया था। प्रांतों के द्वैध शासन में वे दो बातें नहीं मिलतीं, जो संघीय योजना में मिलती हैं और द्वैध शासन में जो एक चीज मिलती है, वह संघ में अप्राप्य है। दो की उपस्थिति और एक की अनुपस्थिति इस संघ में द्वैध शासन को प्रांतों के द्वैध शासन से भी और अधिक खराब बनाती है।