संघ बनाम स्वतंत्रता
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इस संघीय योजना में जो दो नई बातें हैं, उनमें एक है हस्तांतरित विषयों के बारे में गवर्नर - जनरल के विशेष उत्तरदायित्वों का सिद्धांत और दूसरी है सरकारी प्राधिकार का प्रशासकीय नियंत्रण से पृथक्करण, उन विषयों के संबंध में जो हस्तांतरित क्षेत्र में आते हैं। ये दोनों नई चीजें हैं, जो प्रांतों में द्वैध शासन तंत्र के संविधान में नहीं थीं।
यह कहा जा सकता है कि गवर्नर - जनरल का विशेष उत्तरदायित्व साधारणतः निशेषाधिकार का दूसरा नाम है। यह वह शक्ति है, जिससे मंत्रियों के विरुद्ध व्यवस्था की जा सकती है और यहां तक कि ब्रिटिश संविधान में सम्राट को इस प्रकार का निषेधाधिकार प्राप्त है। इसके सम्मुख गवर्नर - जनरल के विशेष उत्तरदायित्वों का यह विचार सही लगता है। लेकिन वास्तव में जिन शर्तों और परिस्थितियों के अधीन सम्राट के निषेधाधिकार का प्रयोग किया जा सकता है, उनके बारे में एक मिथ्या धारणा है।
मेरी जानकारी में एक उत्तरदायी शासन व्यवस्था में सम्राट और उसके मंत्रियों के बीच संबंधों की मैकाले के अतिरिक्त किसी अन्य ने इतनी अच्छी व्याख्या नहीं की है। उनके शब्दों में :
इंग्लैंड में सम्राट अपने निषेधाधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता, जब तक कि कोई
मंत्री सम्राट की कार्यवाही का उत्तरदायित्व ओढ़ने के लिए तैयार नहीं है। अगर कोई
मंत्री उत्तरदायित्व निभाने के लिए तैयार नहीं है, तो सम्राट को समर्पण, संघर्ष अथवा
पद त्याग देना चाहिए। गवर्नर - जनरल की स्थिति भिन्न है। उसे समर्पण करने की
आवश्यकता नहीं। कोई मंत्री अगर उसकी कार्यवाही का उत्तरदायित्व उठाने को
तैयार नहीं है, तो भी वह कार्यवाही कर सकता है। सम्राट के निषेधाधिकार और
गवर्नर-जनरल के निषेधाधिकार में यही अंतर है। ध्यान देने योग्य विशेष महत्व की
बात यह है कि हस्तांतरित क्षेत्र के लिए ही इस निषेधाधिकार का अस्तित्व है। प्रांतों
के द्वैध संविधान में हस्तांतरित क्षेत्र गवर्नर के निषेधाधिकार का विषय नहीं था। दूसरे
शब्दों में, गवर्नर के कोई विशेष उत्तरदायित्व नहींंथे। यदि गवर्नर - जनरल हस्तांतरित
क्षेत्र में मंत्रियों के विरुद्ध व्यवस्था देता है, तो प्रश्न उठता है कि मंत्रियों के उत्तरदायित्व
में क्या सार है। मुझे यह बहुत कम दिखाई पड़ता है।
दूसरी बात जो नई है, वह है सरकारी प्राधिकार और प्रशासकीय नियंत्रण के मध्य पृथक्करण। प्रांतों में द्वैध संविधान में इस प्रकार का प्रावधान नहीं था। प्रांतों के द्वैध संविधान में जब किसी विषय का हस्तांतरण होता था तो सरकारी प्राधिकार और साथ ही प्रशासकीय नियंत्रण, दोनों ही मंत्री को हस्तांतरित होते थे। आप स्वयं अपने से प्रश्न करेंगे कि मंत्रीय उत्तरदायित्व में क्या सार है, अगर एक मंत्री मात्र निर्देश जारी कर सकता है और इसके अंतर्गत कार्यवाही का नियंत्रण नही कर सकता? मुझे यह बहुत कम दिखाई पड़ता है।
प्रांतों के द्वैध शासन के संविधान में जो प्रावधान था और जिसे संघीय संविधान में हटा दिया गया है, उसका संबंध आरक्षित विषयों के लिए वित्त - प्रबंध से है। सन् 1919 के पुराने अधिनियम की धारा 72 डी और वर्तमान अधिनियम की धारा 33 और 34 की इस संबंध में