संघ बनाम स्वतंत्रता
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योजना सरकार के उत्तरदायी महत्वपूर्ण कार्यों के क्षेत्र से अलग है। कांग्रेस संघ के विचार के विरुद्ध नहीं है, परंतु वास्तविक संघ ऐसा होना चाहिए जिसमें दायित्व के प्रश्न से भी अलग ऐसी स्वतंत्र इकाइयों का समावेश हो, जो न्यूनाधिक मात्रा में समान रूप से स्वाधीनता तथा नागरिक स्वतंत्रता और चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा प्रतिनिधित्व का लाभ उठा सकें। संघ में सहभागी होने वाले देशी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं तथा जिम्मेदार सरकार की स्थापना, नागरिक स्वतंत्रता और संघीय सदनों के चुनाव के तरीके प्रांतों के अनुरूप होने चाहिएं। अन्यथा संघ, जैसा कि आज विचार किया गया है, भारत की एकता के निर्माण की बजाए अलगाववादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देगा तथा राज्यों में आंतरिक और बाह्य संघर्ष होने लगेंगे।
इसलिए कांग्रेस प्रस्तावित संघीय योजना की भर्त्सना की पुनः पुष्टि करती है तथा प्रांतीय और स्थानीय कांग्रेस समितियों और सामान्य रूप से लोगों एवं प्रांतीय सरकारों और मंत्रिमंडलों से अनुरोध करती है कि इस योजना को शुरु न करें। यदि लोगों की स्पष्ट इच्छा के बावजूद इस योजना को लागू किया जाता है तो इसका हर प्रकार से विरोध किया जाना चाहिए और प्रांतीय सरकारों को इसमें सहयोग करने से इंकार कर देना चाहिए। यदि इस प्रकार की कोई भी आकस्मिकता उत्पन्न हो जाए, तो अखिल भारतीय कांग्रेस समिति को यह अधिकार है कि वह इस संबंध में अपनाई जाने वाली कार्य की दिशा का निर्धारण करे।
बंबई में आयोजित अपने गत अधिवेशन के समय राष्ट्रीय उदारवादी संघ द्वारा पारित प्रस्ताव इस प्रकार हैः
राष्ट्रीय उदारवादी संघ अपना मत पुनः दोहराता है कि संविधान, विशेष रूप से भारत सरकार अधिनियम, 1935 में दिए गए केन्द्र के संबंध में नितांत असंतोषजनक है और अनेक दृष्टिकोणों से प्रगतिशील नहीं है। राष्ट्रीय उदारवादी संघ यह मानता है कि केवल संघीय प्रकार की सरकार ही हमारे देश के लिए नैसर्गिक सरकार है, जबकि संघ का विचार है कि संघ के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तनों की आवश्यकता होती है, जैसा कि अधिनियम में दिया गया है, विशेष रूप से इनके संबंध में : (क) राजाओं की स्थिति को स्पष्ट करना तथा राज्यों की जनता को राज्यों के प्रतिनिधियों के चुनाव के अधिकार को दिलाना, (ख) आर्थिक नीति और वाणिज्यिक विभेद संबंधी सुरक्षोपायों को समाप्त करना, (ग) प्रांतों द्वारा संघीय सभा के सदस्यों के लिए सीधी चुनाव पद्धति को लागू करना, और (घ) संविधान को पर्याप्त रूप से लचीला बनाना, ताकि भारत को उचित समयावधि में औपनिवेशक राज्य का दर्जा प्राप्त हो सके।
राष्ट्रीय उदारवादी संघ का विचार है कि वर्तमान स्थिति ऐसी है कि केन्द्र में गैर - जिम्मेदार सरकार है और उसके साथ प्रांतों में जिम्मेदार सरकारें हैं। इस स्थिति का समर्थन नहीं किया जा सकता और संसद से अनुरोध किया जाता है कि वह