102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
इस दृष्टि से अनुसूची - 2 का महत्व आवश्यकता से अधिक नहीं समझा जा सकता। मुझे खेद है कि इसने इतना अधिक ध्यान आकर्षित नहीं किया, जितना कि इसे करना चाहिए था। अनुसूची - 2 न केवल एक चार्टर है, अपितु एक चार्ट भी है, जिसके साथ संविधन गतिशील हो सकता है। इस पूरी अनुसूची का सावधानी से अध्ययन करना आवश्यक है। अनुसूची - 2 में क्या कहा गया है? अनुसूची - 2 में बताया गया है कि भारत सरकार अधिनियम के कतिपय उपबंधों को संसद द्वारा संशोधित किया जा सकता है और अधिनियम के कुछ अन्य निश्चित उपबंधों को संसद द्वारा संशोधित नहीं किया जा सकता। यह कहने का एक अन्य सरल तरीका है कि संसद सर्वोच्च नहीं है और संविधान में परिवर्तन करने का उसका अधिकार सीमित है।
उस समय क्या होगा यदि संसद उस अधिनियम के उपबंधों को संशोधित करे, जिसके संबंध में अनुसूची - 2 में कहा गया है कि उन उपबंधों को संसद द्वारा संशोधित नहीं किया जाएगा? इस संबंध में उत्तर की दृष्टि से अनुसूची - 2 में कहा गया है कि इस प्रकार का अधिनियम संघ में देशी राज्यों के विलय को प्रभावित करेगा, जिसका अर्थ होगा कि विलय - पत्र के संयोजनकारी स्वरूप को नष्ट करना। अर्थात् यदि संसद द्वारा इस अधिनियम के किसी भी उपबंध में संशोधन किया जाता है, जिसके बारे में अनुसूची - 2 में बताया गया है कि ऐसे उपबंध में संशोधन नहीं किया जाएगा, तो राजाओं को संघ से अलग होने का अधिकार प्रापत हो जाएगा। मैं इस तथ्य से अवगत हूं कि कुछ प्रख्यात अधिवक्ताओं ने अलग विचार प्रस्तुत किया है। उनकी धारणा है कि यदि एक बार राजा लोग संघ में शामिल हो जाते हैं तो वे इससे बाहर नहीं जा सकते। मैं अपने मत को पहले ही अभिव्यक्त कर चुका हूं और उसे आप जितना योग्य समझें इतनी मान्यता दें, पर मैं यह कहना चाहूंगा कि मेरा मत नितांत आधारहीन नहीं है।
चाहे कुछ भी क्यों न हो हाउस ऑफ कॉमन्स में भारत सरकार के बिल पर बहस के दौरान महान्यायवादी और भारत मंत्री ने इसी प्रकार की व्याख्या की है, जैसा कि मैं अभिव्यक्त कर रहा हूं।
महान्यायवादी ने कहा था :
देशी राज्य ऐसे संघीय ढांचे में सम्मिलित होने के लिए सहमत नहीं होंगे, जो सीमाओं
में निश्चित और असंदिग्ध है तथा स्पष्टतया हम बाद में इस ढांचे को पूर्णतया बदल
नहीं सकते। इस वाक्य खंड का उद्देश्य यह है कि उन मामलों को प्रस्तुत करना
चाहिए, जो आधारभूत अथवा विलय - पत्र से टकराए बिना परिवर्तित किए जा सकते हैं।
...यदि इस संरचना को आधारभूत ढंग से परिवर्तित किया गया तो अलगत्ता देशी
राज्यों को यह स्पष्ट रूप से कहने का अधिकार मिल जाएगा कि यह ऐसा संघ नहीं
है, जिसमें हमने अपने सम्मिलित होने की स्वीकृति दी।
भारत मंत्री ने कहा था :
यदि आप उस बिल के कुछ भागों में संशोधन करते हैं जो देशी राज्यों को प्रभावित