106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
भारतीय उस स्थिति में क्या उत्तर देंगे, यदि वे एक बार संघ को स्वीकार कर लेते हैं और इसके परिणामस्वरूप इसमें विहित लक्ष्यार्थों को स्वीकार कर लेते हैं?
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हम देशी राज्यों का क्या करेंगे? यह ऐसा प्रश्न है, जो प्रायः पूछा जाता है। गणतंत्र में आस्था रखने वालों की इच्छा है कि देशी राज्यों का पूर्ण उन्मूलन कर दिया जाए। जो लोग सरकार के स्वरूप के बारे में चिंता नही करते, वे इस विचार को रद्द कर देंगे। परंतु उन्हें भी इस विचार का पालन करना चाहिए कि जो सर्वोत्तम ढंग से कार्य करता है, वही सर्वोत्तम है। क्या यह कहा जा सकता है कि देशी राज्य सर्वोत्तम ढंग से कार्य करेंगे? मैं यह नहीं जानता कि कोई इस बारे में ऐसा सकारात्मक उत्तर देने के लिए तैयार होगा, जो सभी राज्यों पर लागू होगा। राज्यों का आंतरिक प्रशासन कुप्रबंध के लिए तिरस्कृत है। कुछ ही राज्य इस आरोप से परे होंगे।
लोग सदैव यह पूछते हैं कि राज्यों में इस प्रकार का कुप्रबंध और कुप्रशासन क्यों है? इसका प्रायः यही उत्तर दिया जाता है कि यह व्यक्तिक शासन का परिणाम है। प्रत्येक क्षेत्र से यह मांग की जाती है कि व्यक्तिक शासन के स्थान पर लोकप्रिय सरकार होनी चाहिए। मुझे इस मांग की प्रभावोत्पादकता पर भारी संदेह है। मैं नहीं समझता कि अधिकांश मामलों में लोकप्रिय सरकार की स्थापना से राज्यों के लोगों की परेशानियों का उपचार हो जाएगा, क्योंकि मैं इस बात से आश्वास्त हूं कि लोगों की परेशानियां के कुशासन से जितनी उत्पन्न होती हैं, उतनी ही संसाधनों के अभाव से पैदा होती हैं। कुछ ही व्यक्तियों को यह आभास है कि देशी राज्यों के संसाधन कितने कम हैं।
मैं कुछ तथ्य देना चाहूंगा। कुल 627 राज्यों में से केवल दस राज्य ऐसे हैं, जिनका वार्षिक राजस्व एक करोड़ रुपये से अधिकार है। इन दस राज्यों में से केवल पांच राज्यों का राजस्व लगभग एक करोड़ रुपये हैं, तीन राज्यों का राजस्व दो - सवा दो करोड़ रुपये के बीच में है, एक राज्य का राजस्व लगभग सवा तीन करोड़ रुपये है और केवल एक ही ऐसा राज्य है, जिसका राजस्व लगभग 8 करोड़ रुपये है। नौ राज्य ऐसे हैं, जिनका राजस्व एक करोड़ और 50 लाख रुपये के बीच में रहता है। लगभग 12 राज्य ऐसे हैं, जिनका राजस्व 25 से 50 लाख रुपये के बीच में रहता है और 30 राज्यों का राजस्व 10 से 25 लाख रुपये के बीच में रहता है। शेष 566 राज्यों में से प्रत्येक का वार्षिक राजस्व 10 लाख रुपये से कम है। फिर भी, इससे यह अनुमान नहीं लग पाता कि कुछ राज्य कितने छोटे हैं, जिनका राजस्व 10 लाख रुपये से कम है। इसलिए कुछ उदाहरण दिए जा सकते हैं। इन 566 राज्यों में से एक राज्य का राजस्व