संघ बनाम स्वतंत्रता
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जैसा कि बताया है कि यह आवश्यक है कि ब्रिटिश भारत के लिए केन्द्रीय सरकार का स्वरूप संघीय होगा और इस तथ्य को संविधान द्वारा मान्यता दी गई है।
अनेक व्यक्ति यह देखने में असफल हो गए हैं कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 दो अलग - अलग संघ स्थापित करता है। इनमें से एक संघ ब्रिटिश भारत के प्रांतों के लिए है और दूसरा संघ ब्रिटिश भारत के प्रांतों और देशी राज्यों के लिए है। यह बात आश्चर्यजनक है कि कई व्यक्तियों ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान नहीं दिया। भारत सरकार अधिनियम दो संघों की स्थापना करता है और यह बात विवाद से परे है। यदि इसमें किसी को कोई संदेह है तो फिर उन्हें खंड 3 और खंड 13 को एक साथ तथा खंड 2 तथा ख्ांड 3 को एक साथ पढ़ना चाहिए। खंड 2 और खंड 3 यह स्पष्ट करते हैं कि एक अखिल भारतीय संघ है और उस संघ का संविधान बताते हैं। खंड 3 और खंड 13 इस बात को बताते हैं कि राज्यों से अलग ब्रिटिश भारत के प्रांतों का एक संघ है और उस संघ का संविधान दिया गया है। खंड 13 का संबंध उन उपबंधों से है, जो परिवर्ती कहलाते हैं और ब्रिटिश भारत योजना को संघ से कम नहीं बनाते, क्योंकि कानून कानून है, चाहे यह सीमित अवधि के लिए हो अथवा सार्वकालिक हो।
यह अधिनियम ब्रिटिश भारत के प्रांतों के लिए संघ की स्थापना करता है और अखिल भारतीय संघ से भी इंकार नहीं करता। इन दोनों संघों के बीच क्या अंतर है? क्या संघ की विधायी शक्तियों में कोई अंतर है? इसका उत्तर नकारात्मक है। संघीय विधायी सूची एक जैसी बनी रहती है, चाहे कार्यशील संघ ब्रिटिश भारत संघ हो या अखिल भारतीय संघ हो। समवर्ती सूची भी एक जैसी रहती है, चाहे कार्यशील संघ पहला या दूसरा हो।
क्या वित्तीय शक्तियों में कोई अंतर है? इसका उत्तर भी नकारात्मक है।
कर निर्धारण की शक्तियां भी एक जैसी रहती हैं, चाहे वह अखिल भारतीय संघ हो अथवा ब्रिटिश भारत संघ।
क्या संघ के न्यायिक संगठन में कोई परिवर्तन होता है? इसका उत्तर नकारात्मक है। संघीय न्यायालय की आवश्यकता अखिल भारतीय संघ और ब्रिटिश भारत संघ के लिए समान रूप से होती है।
यह दोनों संघ किस प्रकार एक - दूसरे से अलग हैं? इन दोनों में अंतर केवल एक ही दिशा में होता है। यदि आप यह अंतर जानना चाहते हैं तो धारा 313 की तुलना धारा 8 से करें। इस तुलना से यह विदित होगा कि यदि संघ ब्रिटिश भारत का संघ है तो इस संघ का कार्यकारी प्राधिकार परिषद के गवर्नर - जनरल को होगा अैर यदि यह संघ अखिल भारतीय संघ है तो हस्तांतरित मामलों में कार्यकारी प्राधिकार विधान-मंडल के लिए उत्तरदायी मंत्रियों के परामर्श पर कार्य करने वाले गवर्नर - जनरल को प्राप्त होता। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि यदि ब्रिटिश भारत संघ है तो केन्द्र का कोई उत्तरदायित्व नहीं है, जब तक कि अखिल भारतीय संघ न हो।
इसका अर्थ यह है कि राज्यों का प्रवेश ब्रिटिश भारत को उत्तरदायित्व सौंपने के लिए