2. संघ बनाम स्वतंत्रता - Page 133

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

क्या ब्रिटिश भारत इस संभावना का स्वागत करता है? जहां तक मेरा संबंध है, मैं इसका स्वागत नहीं करूंगा। यह असंभव होगा कि इतने बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़ा जाए। राज्य इतने अधिक हैं कि वे केन्द्रित आक्रमण नहीं होने दे सकते। राज्य इस संरचना का एक भाग हैं, अतः आप उन पर आक्रमण नहीं कर सकते और अपने आक्रमण को संवैधानिक कार्य नहीं बता सकते। दूसरे, आप अपने को ऐसी कठिनाई में क्यों डालते हैं? कभी - कभी ऐसा होता है कि एक व्यक्ति यह सोचता है कि वह संपत्ति खरीद रहा है, जबकि तथ्य यह है कि वह मुकदमेबाजी मोल ले रहा है। ब्रिटिश भारत के लिए संघ को स्वीकार किया जाना विपत्ति को खरीदने के समान है। तीसरे, यह संविधान एक बंदोबस्त है, जिसमें से औपनिवेशक राज्य को अधिकांशतया निर्मतापूर्वक निकाल दिया गया है, जो केवल वर्तमान समय के लिए ही नहीं, अपितु भविष्य के लिए भी है।

किसी भी दृष्टिकोण से इस बात को देखा जाए तो मेरे लिए सबसे बुद्धिमत्तापूर्ण तरीका यह है कि राज्यों को वहीं छोड़ देना चाहिए, जहां वे हैं। ब्रिटिश भारत को अपने विकास और अपने लिए संघ की ओर बढ़ना चाहिए।

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विभिन्न दृष्टिकोणों से संघ

अलग - अलग लोग इस संघ को विभिन्न दृष्टिकोणों से देख रहे हैं। राजाओं का भी अपना दृष्टिकोण है। हिन्दुओं, मुसलमानों और कांग्रेस का भी अपना दृष्टिकोण है। सौदागर और व्यापारियों का भी अपना दृष्टिकोण है। इनमें से प्रत्येक का दृष्टिकोण अपने विशेष हितों के कारण है।

इस संघ में राजाओं का क्या हित है? यदि आप राजाओं के उद्देश्य को समझना चाहते हैं तो आपको बटलर कमेटी की कार्यवाहियों को देखना चाहिए। राजाओं ने सर्वोपरिसत्ता के सिद्धांत के अंतर्गत अपने संधि के अधिकारों पर भारत सरकार के राजनीतिक विभाग के अतिक्रमण की शिकायत की थी। राजा इस बात पर जोर दे रहे थे कि राजनीतिक विभाग को राज्यों के विरुद्ध अधिक अधिकार नहीं थे, सिवाय उन अधिकारों के जो उनके और ब्रिटिश सरकार के बीच की गई संधियों द्वारा दिए गए थे। दूसरी ओर, राजनीतिक विभाग का यह दावा था कि संधियों में दिए गए अधिकारों के अतिरिक्त सम्राट को भी ऐसे अधिकार प्राप्त थे, जो राजनीतिक व्यवहारों और प्रथाओं में संदर्भ योग्य थे। इस विवाद का समाधान करने के लिए भारत मंत्री ने बटलर कमेटी की नियुक्ति के लिए अपनी सहमति प्रदान की। राजाओं को यह आशा थी कि बटलर कमेटी उनके विचारों को स्वीकार कर लेगी और संधियों में दिए गए अधिकारों तक सर्वोपरि सत्ता के कार्य - क्षेत्र को सीमित कर देगी। दुर्भाग्यवश राजा लोग इस संबंध में हताश हो गए, क्योंकि बटलर कमेटी ने यह रिपोर्ट दी कि प्रभुसत्ता सर्वोच्च है और इसकी न तो कोई परिभाषा की जा सकती है और न इसका सीमांकन। बटलर कमेटी के