सांप्रदायिक गतिरोध और उसके समाधान के उपाय 129
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संविधान सभा
मैं जो दूसरा प्रश्न उठाना चाहता हूं, वह यह है : क्या संविधान सभा होनी चाहिए, जिसे संविधान निर्माण करने का कार्य सौंपा जाए? संविधान सभा का जिक्र प्रत्येक व्यक्ति की जबान पर है। कांग्रेस दलों ने अपने प्रस्तावों में, जो कांग्रेस मंत्रिमंडल के त्याग - पत्र देने से पूर्व पारित किए थे, यह मांग की थी कि भारत के संविधान का निर्माण भारतीयों द्व ारा बनाई गई संविधान सभा द्वारा किया जाए। क्रिप्स के प्रस्तावों में संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव भी सम्मिलित था। सप्रू सीमित ने भी इस प्रस्ताव का अनुमोदन किया है।
मैं यह बताना चाहूंगा कि मैं संविधान सभा के प्रस्ताव के पूरी तरह विरुद्ध हूं। यह बहुत ही अनावश्यक है। मैं मानता हूं कि यह एक ऐसी खतरनाक योजना है, जो इस देश को गृह - युद्ध में झोंक सकती है। पहले तो मेरी समझ में यही नहीं आता कि संविधान सभा की क्यों आवश्यकता है। भारतीयों की वैसी स्थिति नहीं है, जैसी कि अमरीका के संविधान - निर्माताओं की उस समय थी, जब उन्होंने संयुक्त राज्य अमरीका का संविधान बनाया था। उन्हें ऐसे विचार प्रस्तुत करने थे, जो स्वतंत्र लोगों के संविधान के लिए उपयुक्त थे। उनके सामने संविधान के ऐसे नमूने नहीं थे, जिनका संदर्भ - सामग्री के रूप में उपयोग किया जा सके। लेकिन भारतीयों के संबंध में ऐसी स्थिति नहीं हो सकती। संवैधानिक विचार और संवैधानिक प्रारूप सुलभ हैं। फिर भी चयन की बहुत कम गुंजाइश है। दो या तीन संविधान से अधिक संविधानों के नमूने उपलब्ध नहीं हैं, जिनमें से चयन किया जाए। तीसरे, शायद ही कोई बड़ा और केवल संवैधानिक प्रश्न हो, जिसके बारे में यह कहा जा सके कि भारतीयों में अधिक विवाद है। इस प्रश्न पर सहमति है कि भावी भारतीय संविधान संघीय होना चाहिए। यह भी लगभग तय हो चुका है कि कौन - कौन से विषय केन्द्र सरकार के पास रहेंगे और कौन - कौन से विषय प्रांतों को सौंपे जाएंगे। राजस्व के विभाजन के बारे में केन्द्र और प्रांतों के बीच कोई विवाद नहीं है और मताधिकार के बारे में भी कोई विवाद नहीं है। इसके अतिरिक्त न्यायपालिका का विधायिका और कार्यपालिका के साथ क्या संबध होगा, इस पर भी कोई विवाद नहीं है। विवाद का जो मुद्दा अनिर्णित है, वह अवशिष्ट शक्तियों के प्रश्न से संबंद्ध है कि क्या ये शक्तियां केन्द्र के हाथ में रहें अथवा प्रांतों को दे दी जाएं। परंतु यह मामला मामूली है। वास्तव में, वर्तमान भारत सरकार अधिनियम में दी गई व्यवस्था को श्रेष्ठ समझौते के रूप में अपनाया जा सकता था।
इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं यह नहीं समझ पा रहा कि संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा क्यों आवश्यक है। भारत सरकार अधिनियम, 1935 में भारत का संविधान पहले ही बहुत कुछ लिखा जा चुका है। ऐसा लगता है कि संविधान सभा गठित करना केवल उसी कार्य की पुनरावृत्ति जान पड़ती है, जो एक बार फिर किया जाना है। अब केवल यह करना आवश्यक है कि भारत सरकार अधिनियम, 1935 की उन सभी धाराओं को निकाल