3. सांप्रदायिक गतिरोध और उसके समाधान के उपाय - Page 147

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

दिया जाए, जिनमें औपनिवेशिक राज्य के दर्जे का विरोध किया गया है।

संविधान सभा के लिए केवल एक ही कार्य शेष है कि सांप्रदायिक समस्या का किस प्रकार समाधान किया जाए। मेरा दृढ़ विचार है कि संविधान सभा के विचारार्थ विषय कुछ भी क्यों न हों, सांप्रदायिक प्रश्न को उनमें सम्मिलित नहीं किया जाना चाहिए। सप्रू समिति ने जो सुझाव दिए हैं, उनके अनुसार संविधान सभा के गठन पर विचार करना चाहिए। कुल सदस्यों की संख्या 160 निर्धारित की गई है। प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अंतर्गत चुनाव होगा और उपस्थिति तथा मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के तीन चौथाई बहुमत से निर्णय लिया जाएगा। क्या अल्पसंख्यक वर्ग इस संविधान सभा को सुरक्षित संस्था मान सकते हैं, जिसकी निष्पक्षता के प्रति वे पूर्ण रूप से आश्वस्त हो सकें? इस प्रश्न का उत्तर दो अन्य प्रश्नों के उत्तर पर निर्भर करता हैः क्या इससे यह गारंटी मिल सकेगी कि संविधान सभा में निर्वाचित अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिनिधि वर्ग के प्रतिनिधि इसके सच्चे प्रतिनिधि होंगे? दूसरे, क्या इससे यह गारंटी मिल सकती है कि किसी विशेष अल्पसंख्यक वर्ग के दावों के संबंध में संविधान सभा का निर्णय वास्तव में किसी अल्पसंख्यक वर्ग पर आरोपित नहीं किया जाएगा? इन प्रश्नों में से किसी भी प्रश्न पर मैं विश्वास के साथ नहीं कह सकता कि अल्पसंख्यक वर्ग को डरने की आवश्यकता नहीं है।

इन प्रश्नों को उठाने से पूर्व मैं यह बताना चाहूंगा कि संविधान सभा के बारे में क्रिप्स समिति और सप्रू समिति की योजना में क्या अंतर है :

(1) सप्रू समिति ने संविधान सभा के कुल सदस्यों की सुख्या 160 निर्धारित की है।

सर स्टेफोर्ड क्रिप्स ने कोई भी संख्या निर्धारित नहीं की। परंतु उनके प्रस्ताव में

यह व्यवस्था की गई है कि संविधान सभा में प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों

की कुल संख्या का 10 प्रतिशत भाग होगा, अर्थात् यह संख्या निर्धारित कर दी

गई है जो लगभग 158 होती है। इसमें केवल दो सदस्यों का अंतर है।

(2) सप्रू समिति द्वारा संविधान सभा के चुनाव का जो तरीका बताया गया है, वह

आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अंतर्गत संयुक्त चुनाव - पद्धति से हुआ चुनाव है।

इस तरीके में संविधान सभा के गठन के लिए क्रिप्स योजना तथा सप्रू योजना

में कोई अंतर नहीं है।

(3) क्रिप्स योजना के अंतर्गत संप्रदाय आधारित आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं

था। इस प्रकार सप्रू योजना क्रिप्स योजना से भिन्न है, क्योंकि इसके अनुसार

निर्धारित अनुपात में विशेष समुदायों के लिए स्थान आरक्षित करने की व्यवस्था

है। यह अंतर केवल साधारण - सा है। यद्यपि क्रिप्स योजना में संख्या का निर्धारण

नहीं किया गया, तथापि आनुपातिक प्रतिनिधित्व की योजना का वास्तव में यही

परिणाम होता कि इस प्रकार का आरक्षण हो। इन दोनों योजनाओं के अंतर्गत

प्रतिनिधित्व के कोटा का अंतर आगे दी गई तालिका में दिखाया गया है।