138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
है कि प्रशासकीय प्रथा को संवैधानिक दायित्व में परिवर्तित कर दिया जाए। ऐसा तभी किया जा सकता है, जब भारत सरकार अधिनियम में एक अनुसूची जोड़ दी जाए। इसमें इन प्रस्तावों में दिए गए उपबंध और अलग - अलग प्रांतों के लिए इसी प्रकार के उपबंध सम्मिलित किए जाएंगे तथा यह अनुसूची संविधान के कानून का एक भाग होगी।
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इस प्रश्न से तीन बातें सामने आती हैं :
(1) कार्यपालिका में प्रतिनिधियों की संख्या,
(2) कार्यपालिका का स्वरूप, और
(3) कार्यपालिका में स्थानों को भरने का तरीका।
कार्यपालिका मं प्रतिनिधियों की संख्या
इस प्रश्न के समाधान के लिए जो सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए, वह यह है कि हिन्दुओं, मुसलमानों तथा अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व विधान-मंडल के अपने प्रतिनिधित्व की मात्रा के बराबर होना चाहिए।
जहां तक सिख, भारतीय ईसाई और आंग्ल भारतीय जैसे अन्य अल्पसंख्यक वर्गों का प्रश्न है, यह कठिन है कि विधान-मंडल के अपने प्रतिनिधित्व के सही अनुपात में उन्हें कार्यपालिका में प्रतिनिधित्व दिलाया जाए। यह कठिनाई इसलिए उत्पन्न होती है कि उनकी संख्या बहुत कम है। यदि उन्हें अपनी संख्या के ठीक अनुपात में कार्यपालिका में स्थान दिए जाते हैं तो कार्यापालिका को असामान्य रूप से बढ़ाना होगा। इसलिए यह सभी कुछ तब हो सकता है, जब उनके प्रतिनिधित्व के लिए मंत्रिमंडल में एक - दो स्थान सुरक्षित कर लिए जाएं तथा एक परिपाटी स्थापित की जाए कि उन्हें उन ससंदीय सचिवों में सही अनुपात में प्रतिनिधित्व मिल जाएगा, जिनकी संख्या में उस समय वृद्धि की जाएगी, जब नवीन संविधान लागू हो जाएगा।
कार्यपालिका का स्वरूप
मैं कार्यपालिका के गठन के लिए नीचे दिए गए सिद्धांतों का प्रस्ताव करूंगा :
(1) यह स्वीकार करना चाहिए कि भारत जैसे देश में, जहां बहुसंख्यक वर्ग तथा
अल्पसंख्यक वर्ग में अनवरत विद्वेष है और इस कारण अल्पसंख्यक वर्ग के
विरुद्ध बहुसंख्यक वर्ग द्वारा सांप्रदायिक भेदभाव का खतरा अल्पसंख्यक वर्ग
के लिए सतत् संकट बना हुआ है, विधायी शक्ति की अपेक्षा कार्यकारी शक्ति
का अधिक महत्व हो जाता है।
(2) उपर्युक्त (1) के अनुसार, यदि ऐसी पद्धति के अंतर्गत चुनाव में किसी पार्टी
ने बहुमत प्राप्त कर लिया है तो उस पार्टी को इस परिकल्पना के आधार पर
सरकार बनाने का अधिकार होगा कि उस पार्टी को बहुमत का विश्वास प्राप्त
है, जब कि भारतीय परिस्थितियों में यह असमर्थनीय है। भारत में बहुसंख्यक