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सांप्रदायिक गतिरोध और उसके समाधान के उपाय 147

वर्तमान अवस्था में मुझे लगता है कि इन पिछड़े समदुयों के लिए उचित मार्ग यही है कि उनके प्रशासन के लिए एक संवैधानिक आयोग की उसी आधार पर स्थापना कर दी जाए जिन्हें अब हम बहिष्कृत क्षेत्र कहते हैं, जो दक्षिण अफ्रीकी संविधान के लिए अपनाया गया था। प्रत्येक प्रांत में बहिष्कृत क्षेत्र स्थित हैं, अतः ऐसे प्रत्येक प्रांत पर दबाव डालना चाहिए कि वह इन क्षेत्रों के प्रशासन के लिए निर्धारित राशि का वार्षिक योगदान करे।

आप देखेंगे कि मेरे प्रस्तावों में देशी राज्य शामिल नहीं किए गए हैं। मैं देशी राज्यों को शामिल किए जाने का विरोधी नहीं हूं, परंतु उनके शामिल किए जाने के नियम और शर्तें इस प्रकार हैं :

(1) ब्रिटिश भारत और देशी राज्यों के मध्य विभाजित प्रभुसत्ता के द्विभाजन को पूर्ण

रूप से प्राप्त कर दिया जाए,

(2) न्यायिक और राजनीतिक सीमाएं जो ब्रिटिश भारत को देशी राज्यों से अलग करती

हैं, समाप्त हो जाएंगी। ब्रिटिश भारत या देशी राज्य जैसी कोई सत्ता शेष नहीं रहेगी

और उनके स्थान पर केवल एक सत्ता होगी, जिसे भारत कहा जाएगा, और

(3) सम्मिलित किए जाने के निबंधन और शर्तें भारत को औपनिवेशिक राज्य के पूर्ण

और समग्र अधिकारों को प्राप्त करने में बाधा नहीं डालतीं। मैंने देशी राज्यों और

ब्रिटिश भारत के विलय की एक योजना बनाई है, जिससे इन उद्देश्यों की सिद्धि

हो जाएगी। मै। इस योजना का अधिक विवरण देकर अपने भाषण को बोझिल

नहीं बनाना चाहता। इस समय यह ठीक है कि ब्रिटिश भारत देशी राज्यों के

साथ मिलकर अपने उद्देश्य की ओर अग्रसर हो।

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मेरे प्रस्ताव संयुक्त भारत के लिए हैं। ये प्रस्ताव इस आशा से प्रस्तुत किए गए हैं कि मुसलमान पाकिस्तान के स्थान पर इन प्रस्तावों को स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि ये प्रस्ताव पाकिस्तान द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा की अपेक्षा अधिक सुरक्षा प्रदान करेंगे। मैं पाकिस्तान का विरोधी नहीं हूं। मेरा विश्वास है कि यह आत्म - निर्णय के सिद्धांत के आधार पर बनाया गया है और इसको अब चुनौती देने का समय व्यतीत हो चुका है। मैं उन्हें सिद्धांत का लाभ देने के लिए तैयार हूं, परन्तु शर्त यह है कि मुसलमान उस क्षेत्र में रहने वाले गैर - मुसलमानों को उन सिद्धांतों के लाभ से वंचित न करें। परंतु मेरा विचार है कि मैं मुसलमानों का ध्यान सुरक्षा की एक अन्य तथा अपेक्षाकृत अधिक हितकर योजना की ओर आकर्षित करूं। मेरा दावा है कि पाकिस्तान ने जो योजना बनाई है, उससे कहीं अधिक हितकर मेरी योजना है। मैं उन मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा, जो