संयुक्त राज्य भारत का संविधन
प्रस्तावित उद्देश्यिका
| Col1 | Col2 | Col3 |
|---|---|---|
| Col1 | Col2 | Col3 | Col4 |
|---|---|---|---|
स्पष्टीकरण के लिए
देखिए, पृष्ठ 189
प्रांत और केन्द्र प्रशासित क्षेत्र नामक प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित ब्रिटिश भारत राज्य - क्षेत्रों के और देशी राज्यों के राज्य - क्षेत्रों के हम लोग, इन राज्य - क्षेत्रों का एक परिपूर्ण संघ बनाने की दृष्टि से यह आदेश करते हैं कि प्रांत और केन्द्र प्रशासित क्षेत्र (जिन्हें बाद में राज्य कहा जाएगा) तथा देशी राज्य एक साथ मिलकर संयुक्त राज्य भारत नाम से विधायी, कार्यकारी और प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए एक राज - निकाय का गठन करेंगे और इस प्रकार निर्मित संघ अविघटनीय होगा तथा इसका उद्देश्य इस प्रकार होगा :
(i) अपने लिए और अपनी भावी पीढि़यों के लिए संपूर्ण संयुक्त राज्य भारत में
स्वशासन तथा सुशासन, दोनों का वरदान प्राप्त करना,
(ii) प्रत्येक देशवासी के जीवन, स्वतंत्रता तथा सुख प्राप्त करने और
वाक् - स्वातंत्र्य एवं धर्म - स्वातंत्र्य संबंधी अधिकार का अनुरक्षण करना,
(iii) सुविधा - वंचित वर्गों को बेहतर अवसर सुलभ कराते हुए सामाजिक, राजनीतिक
और आर्थिक विषमता को दूर करना,
(iv) प्रत्येक देशवासी के लिए अभाव और भय से मुक्ति दिलाने को संभव बनाना,
और
(v) आंतरिक अव्यवस्था और बाह्य आक्रमण को रोकने की व्यवस्था करना।
उपर्युक्त से हम संयुक्त राज्य भारत के लिए इस संविधान की स्थापना करते हैं।