4. राज्य और अल्पसंख्यक - Page 176

राज्य और अल्पसंख्यक

159

अनुच्छेद 1 - अनुभाग 1
अनुच्छेद 1
अनुभाग 1

देशी राज्यों का संघ में शामिल होना

[k aM

स्पष्टीकरण के लिए संयुक्त राज्य भारत, आवेदन करने पर तथा संघ विधान -

देखिए, पृष्ठ 189 - मंडल के समर्थकारी अधिनियम, जिसमें संविधान का प्रारूप

190 अधिकथित किया गया है, द्वारा विहित शर्तों के पूरा होने पर

किसी देशी राज्य को संघ में मिला सकता है, बशर्तें कि प्रवेश चाहने वाला देशी राज्य एक अर्हित राज्य हो।

इस खंड के प्रयोजनार्थ अर्हित देशी राज्यों की एक सूची तैयार की जाएगी। कोई राज्य तब तक अर्हित राज्य नहीं समझा जाएगा, जब तक यह कि साबित न हो जाए कि वह संघ विधान-मंडल द्वारा विहित नामक आकार का है तथा उसमें इतने प्राकृतिक संसाधन हैं, जो उसकी जनता के लिए उत्तम रहन - सहन का स्तर प्रदान करने में मदद कर सकें तथा अपने राजस्व और जनसंख्या के कारण, एक स्वायत्त राज्य के रूप में काम कर सके और बाहरी आक्रमण से अपनी रक्षा कर सके तथा आंतरिक अशांति दूर करके कानून और व्यवस्था बनाए रख सके तथा अपनी जनता को प्रशासन और कल्याण के उन न्यूनतम मानकों की गारंटी दे सके, जिनकी आशा एक आधुनिक राज्य से की जाती है।

[k aM

जो देशी राज्य अर्हित राज्य है, किन्तु जो संघ में शामिल नहीं है, उसका राज्य - क्षेत्र और अनर्हित देशी राज्यों का राज्य - क्षेत्र संयुक्त राज्य भारत के सम्मिलित राज्य - क्षेत्र माने जाएंगे और सदैव उसके अभिनन अंग बने रहेंगे और संयुक्त राज्य भारत के संविधान के ऐसे भागों के अधीन रहेंगे, जो संघ विधान-मंडल द्वारा विहित किए जाएं।

[k aM

संयुक्त राज्य भारत को अनर्हित देशी राज्यों के राज्य - क्षेत्रों का सुधार करने, पुनः व्यवस्थित करने, पुनः विभाजित करने तथा संघ के राज्य के रूप में संघ में प्रवेश के लिए उपयुक्त प्रशासनिक इकाइयों में सम्मिलित करने की शक्ति होगी।