राज्य और अल्पसंख्यक 161
खंड 1. सांप्रदायिक कार्यपालिका से संरक्षण
खंड 2. सामाजिक और शासकीय अत्याचार से संरक्षण
खंड 3. सामाजिक बहिष्कार से सरंक्षण
खंड 4. लोक प्रयोजनों के लिए, जिनमें अल्पसंख्यकों के लिए लाभप्रद
प्रयोजन भी शामिल हैं, संघ और राज्य सरकारों का धन खर्च
करने का प्राधिकार और बाध्यता।
अनुच्छेद 2, अनुभाग 4 - अनुसूचित जातियों के लिए सुरक्षोपाय
भाग 1. प्रत्याभूतियां :
खंड 1. विधान - मंडल में और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व का
अधिकार
खंड 2. कार्यपालिका में प्रतिनिधित्व का अधिकार
खंड 3. सेवाओं में प्रतिनिधित्व का अधिकार
भाग 2. विशेष उत्तरदायित्व :
खंड 1. उच्च शिक्षा के लिए
खंड 2. पृथक बस्तियों के लिए
भाग 3. सुरक्षोपायों तथा सुरक्षोपायों के संशोधन की मंजूरी :
खंड 1. सुरक्षोपाय संविधान में लेखबद्ध हों
खंड 2. सुरक्षोपायों का संशोधन
भाग 4. देशी राज्यों में अनुसूची जातियों का संरक्षण
भाग 5. निर्वचन
अनुच्छेद 2 - अनुभाग 1
| xfj | dk |
|---|
| d | s |
|---|
| v | fèk | dk |
|---|
अनुच्छेद 2
अनुभाग 1
संयुक्त राज्य भारत के संविधान में निम्नलिखित को नागरिकों के मूल अधिकारों के रूप में माना जाएगा :
- वे सभी व्यक्ति जो संयुक्त राज्य भारत की सीमाओं के अंतर्गत पैदा हुए हैं स्पष्टीकरण के लिए या उनको नागरिकता प्रदान की गई है, सयुंक्त राज्य भारत के देखिए, पृष्ठ 190 और उस राज्य के नागरिक हैं, जिसमें वे निवास करते हैं। दर्जा,
जन्म, व्यक्ति, परिवार, धर्म या धार्मिक प्रथा और रीति - रिवाज के कारण उत्पन्न कोई भी विशेषाधिकार या निर्योग्यता समाप्त की जाती है। 2. कोई भी राज्य ऐसी कोई विधि या प्रथा नहीं बनाएगा या परिवर्तित करेगा, जो