राज्य और अल्पसंख्यक 163
(क) जो आभ्यासिक अपराधी रहे हों;
(ख) जिनका बसने का आशय राज्य के सांप्रदायिक संतुलन को बदलना हो;
(ग) जो उस राज्य की, जिसमें वह बसना चाहते हैं, तसल्ली के अनुसार
यह साबित नहीं कर सकें कि उनके पास निर्वाह के पक्के साधन हैं
और जिनके लोक - खैरात पर निर्भर रहने की संभावना हो या जो उस
पर स्थायी रूप से निर्भर हो चुके हों;
(घ) जिनके मूल राज्य ने उनके अनुरोध करने पर भी उनके लिए पर्याप्त
सहायता देने से इंकार कर दिया हो।
(v) बसने की अनुज्ञा इस शर्त के साथ दी जा सकती है कि आवदेक काम
करने के योग्य हो और अपने मूल स्थान पर लोक - खैरात पर स्थायी रूप
से निर्भर न हो और वह बेरोजगारी के लिए प्रतिभूति देने में समर्थ हो।
(vi) प्रत्येक निष्कासन की पुष्टि संघ सरकार द्वारा अवश्य की जाएगी।
(vii) संघ विधान-मंडल बसने और निवास करने के अंतर को परिभाषित करेगा,
और साथ ही निवास के दौरान व्यक्तियों के राजनीतिक और नागरिक
अधिकारों पर लागू होने वाले विनिमय विहित करेगा।
संघ सरकार किसी भी समुदाय के उत्पीड़न के विरुद्ध एवं भारत के किसी भी हिस्से में होने वाली हिंसा या आंतरिक अशांति के विरुद्ध संरक्षण की गारंटी देगी।
किसी व्यक्ति से बलात श्रम करवाना या सकी मर्जी के विरुद्ध दासता करवाना अपराध होगा।
अनुचित तलाशी और अभिग्रहण से अपने शरीर, मकान, कागजों और चीजों को सुरक्षित रखने के लोगों के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जाएगा तथा शपथ या प्रतिज्ञान से समर्थित संभावित कारण और तलाश की जाने वाली जगह का विशेष रूप से उन व्यक्तियों या चीजों का उल्लेख किए बिना जिनका अभिग्रहण किया जाना है, कोई भी वारंट जारी नहीं किए जाएंगे।
किसी भी नागरिक को, अल्पायु कारावास और पागलपन को छोड़कर, अन्य किसी कारण से उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा या उसके इस अधिकार को कम नहीं किया जाएगा।
ऐसी कोई विधि नहीं बनाई जाएगी जो वाक्, प्रेस, संस्था और सभा करने की स्वतंत्रता को कम करती हो, लेकिन लोक - व्यवस्था और नैकिता का ध्यान रखा जाएगा।
कोई भी बिल ऑफ अटेन्डर या कार्योत्रर विधि पारित नहीं की जाएगी।
राज्य प्रत्येक भारतीय नागरिक को अंतःकरण की स्वाधीनता तथा उसको अपने धर्म के अबाध आचरण की, जिसके अंतर्गत धर्म को मानने, प्रचार करने तथा लोक - व्यवस्था और नैतिकता के अनुरूप सीमाओं के भीतर धर्म - परिवर्तन का अधिकार भी है, गारंटी देगा।