166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
खंड 3
भेदभाव से संरक्षण (स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 193) लोकऔर वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा नागरिकों 1. जाति या पंथ या सामाजिक स्थिति के आधार पर - प्रशासन में सरकारी अधिकारियों द्वारा अथवा कारखानों के साथ भेदभाव एक अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों पर विचार करने का क्षेत्राधिकार एक अधिकरण में विहित होगा, जो इस प्रयोजन के लिए गठित किया जाएगा।
- संघ विधान - मंडल को समुचित विधान द्वारा इस उपबंध को प्रभावी रूप देने का अधिकार होगा तथा वह इसके लिए बाध्य होगा।
खंड 4
संयुक्त राज्य भारत अपने संविधान की विधि के भाग के रूप में यह घोषणा करेगा कि -
आर्थिक शोषण से संरक्षण (स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 193.198)
वे उद्योग जो प्रमुख उद्योग हैं अथवा जिन्हें प्रमुख उद्योग घोषित किया जाए, राज्य के स्वामित्व में रहेंगे और राज्य द्वारा चलाए जाएंगे;
वे उद्योग जो प्रमुख उद्योग नहीं हैं, किन्तु बुनियादी उद्योग हैं, राज्य के स्वामित्वाधीन रहेंगे और राज्य द्वारा या राज्य द्वारा स्थापित निगमों द्वारा चलाए जांएगे;
बीमा राज्य के एकाधिकार में रहेगा और राज्य हर वयस्क नागरिक को विवश करेगा कि वह अपनी आय के अनुरूप ऐसी जीवन बीमा पालिसी ले, जो विधान-मंडल द्वारा विहित की जाए;
कृषि राज्य उद्योग होगा;
राज्य गैर - सरकारी व्यक्तियों द्वारा निंयत्रित ऐसे उद्योगों, बीमा और कृषि भूमि में उनके जीविका संबंधी अधिकार, चाहे स्वामी के नाते हों या पट्टेदार या बंधकदार के नाते, अर्जित करेगा और उन्हें भूमि में उनके अधिकार के बराबर ऋणपत्र के रूप में मुआवजा अदा करेगा। परंतु भूमि, संयंत्र या प्रतिभूति का मूल्य निकालते समय उसमें आपात स्थिति के कारण हुई वृद्धि की किसी भी संभावना को, अथवा अनुपार्जित मूल्य या अनिवार्य अर्जन के किसी भी मूल्य को हिसाब में नहीं लिया जाएगा;
राज्य यह निर्धारित करेगा कि कब और कैसे ऋणपत्र - धारक नकद भुगतान की मांग करने के लिए हकदार होगा;
ऋणपत्र अंतरणीय और विरासत - योग्य संपत्ति होंगे, किन्तु न तो ऋणपत्र - धारक और न ही मूल - धारक का अंतरिती और न ही उसका वारिस राज्य द्वारा अर्जित किसी भी औद्योगिक संस्थान में हित या भूमि की वापसी का दावा करने के लिए हकदार होगा अथवा उसके संबंध में किसी भी तरीके से व्यवहार करने के लिए हकदार होगा;