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राज्य और अल्पसंख्यक 167

  1. ऋणपत्र - धारक अपने ऋणपत्र पर ऐसी दर पर जो विधि द्वारा निश्चित की जाए, ब्याज के लिए हकदार होगा, जो राज्य द्वारा नकदी में या वस्तु के रूप में, जैसा वह ठीक समझे, अदा किया जाएगा;

  2. कृषि उद्योग निम्नलिखित आधार पर संगठित किया जाएगा -

(i) राज्य अर्जित भूमि को मानक आकार के फार्मों में विभाजित करेगा और उन्हें

गांव के निवासियों को पट्टेदारों के रूप में (कुटुंबों के समूह से निर्मित) आगे

दी गई शर्तों पर खेती करने के लिए देगा :

(क) फार्म पर खेतीबारी सामूहिक फार्म के रूप में की जाएगी;

(ख) फार्म पर खेतीबारी सरकार द्वारा जारी किए गए नियमों और निदेशों

के अनुसार की जाएगी;

(ग) पट्टेदार फार्म पर उचित रूप से उगाही करने योग्य प्रभार अदा करने

के बाद फार्म की शेष उपज को आपस में विहित राशि से बांटेंगे;

(ii) भूमि गांव के लोगों को जाति या पंथ के भेदभाव के बिना पट्टे पर दी जाएगी

और ऐसी रीति से पट्टे पर दी जाएगी कि कोई जमींदार न रहे, कोई पट्टेदार

न रहे और न कोई भूमिहीन मजदूर रहे;

(iii) राज्य पानी, जोतने - बोने के लिए पशु, उपकरण, खाद, बीज, आदि देकर

सामूहिक फार्म की खेती के लिए वित्तीय सहायता देने के लिए बाध्य

होगा;

(iv) राज्य समर्थ होगा -

(क) फार्म की उपज पर निम्नलिखित प्रभार लेने के लिए :

(i) भू - राजस्व का एक अंश;

(ii) ऋणपत्र - धारकों को अदा करने के लिए एक अंश;

(iii) प्रदत्त पूंजीगत माल के उपयोग के लिए अदा करने के लिए

एक अंश; तथा

(ख) उन पट्टेदारों के विरुद्ध जुर्माना विहित करने के लिए हकदार होगा,

जो पट्टेदारी की शर्तों को तोड़ें अथवा राज्य द्वारा प्रदत्त खेतीबारी

के साधनों का सर्वोत्तम उपयोग करने में जान - बूझकर उपेक्षा करें या

अन्यथा सामूहिक खेती की स्कीम पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले ढंग

से कार्य करें।

  1. योजना यथाशीघ्र चालू की जाएगी, लेकिन इसे चालू किए जाने की अवधि किसी भी स्थिति में संविधान लागू होने की तारीख से दसवें वर्ष के बाद नहीं बढ़ाई जाएगी।