4. राज्य और अल्पसंख्यक - Page 185

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

अनुच्छेद 2 - अनुभाग 3

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अनुच्छेद 2

अनुभाग 3

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए उपबंध

संयुक्त राज्य भारत के संविधान में यह उपबंध होगा :

खंड 1

सांप्रदायिक कार्यपालिका से 1. केन्द्रीय अथवा राज्य की कार्यपालिका इस अर्थ में

संरक्षण (स्पष्टीकरण के लिए गैर - संसदीय होगी कि उसे विधान-मंडल के कार्यकाल से

देखिए, पृष्ठ 198 - 201) पहले नहीं हटाया जा सकेगा।

  1. यदि कार्यपालिका के सदस्य विधान-मंडल के सदस्य नहीं हैं, तो भी उन्हें विधान-मंडल में बैठने, बोलने, मतदान करने और प्रश्नों का उत्तर देने का अधिकार होगा :

  2. प्रधानमंत्री का निर्वाचन एकल संक्रमणीय मद से संपूर्ण सदन द्वारा किया जाएगा।

  3. मंत्रिमंडल में विभिन्न अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों का निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत से विधान-मंडल में प्रत्येक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा किया जाएगा।

  4. कार्यपालिका में बहुसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों का निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत से पूरे सदन द्वारा किया जाएगा।

  5. मंत्रिमंडल का सदस्य अविश्वास प्रस्ताव पर अथवा अन्यथा अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है, किन्तु भ्रष्टाचार या राजद्रोह के आधार पर सदन द्वारा महाभियोग के सिवाय उसे हटाया नहीं जा सकेगा।

खंड 2

  1. एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जिसे अल्पसंख्यकों के कार्यों का अधीक्षक कहा जाएगा।

  2. उसकी स्थिति भारत सरकार अधिनियम, 1935 की सामाजिक और शासकीय धारा 166 के अधीन नियुक्त महालेखा परीक्षक जैसी होगी अत्याचार (स्पष्टीकरण के और वह उसी प्रकार और वैसे ही आधारों पर पद से हटाया लिए देखिए, पृष्ठ 201) जा सकता है, जैसे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश।

  3. उस अधीक्षक का यह कर्त्तव्य होगा कि वह इस बारे में एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करे कि जनता एवं संघ और राज्यों की सरकारों ने अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव किया है तथा क्या सरकारों या उनके अधिकारियों ने सांप्रदायिक द्वेषभाव के कारण उनके सुरक्षोपायों का उल्लंघन किया है या उनके साथ अन्याय किया है।

  4. अधीक्षक की वार्षिक रिपोर्ट संघ और राज्य विधान-मंडलों के पटल पर रखी जाएगी तथा संघ और राज्यों की सरकारें रिपोर्ट पर चर्चा के लिए समय देने के लिए आबद्ध होंगी।