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राज्य और अल्पसंख्यक

अनुच्छेद 2 - अनुभाग 4 अनुच्छेद 2

अनुभाग 4

अनुसूचित जातियों के लिए सुरक्षोपाय

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भाग 1

प्रत्याभूतियां (गारंटियां)

विधान-मंडल में प्रतिनिधित्व का अधिकार (स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 204-210)

संयुक्त राज्य भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों के लिए आगे दिए गए अधिकारों की गारंटी दी जाएगीः

खंड 1

विधान

मंडल में प्रतिनिधित्व का अधिकार

  1. प्रतिनिधित्व की मात्रा (क)

(i) अनुसूचित जातियों को संघ और राज्य विधान-मंडल में न्यूनतम प्रतिनिधित्व

मिलेगा और यदि समूह संविधान होगा तो समूह विधानमंडल में कुल जनसंख्या

से उनकी जनसंख्या के अनुपात के बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा, बशर्ते कि

अन्य किसी अल्पसंख्यक जाति को उसकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक

प्रतिनिधित्व का दावा नहीं करने दिया जाए।

(ii) सिन्ध और उत्तर - पश्चिमी सीमा प्रांतों की अनुसूचि जातियों को उनके उचित

हिस्से का प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

(iii) जहां विशाल सांप्रदायिक बहुसंख्यक को एक उचित सीमा के भीतर रखना

आवश्यक हो जाए, वहां अधि - प्रतिनिधित्व बहुसंख्यक के हिस्से में से लिया

जाएगा। किसी भी हालत में यह किसी अन्य अल्पसंख्यक जाति को हानि

पहुंचा कर नहीं होगा।

(iv) बहुसंख्यकों के हिस्से में से निकाला गया अधि - प्रतिनिधित्व किसी एक

समुदाय को ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि उसे समस्त अल्पसंख्यक समुदायों

में बराबर - बराबर अथवा उनकी -

(1) आर्थिक स्थिति,

(2) सामाजिक स्थिति, और

(3) शैक्षिक प्रगति

के विलोम अनुपात में बांटा जाएगा।

(ख) विशेष हितों के लिए कोई प्रतिनिधित्व नहीं होना चाहिए। किन्तु यदि यह

अनुज्ञात कर दिया जाए तो यह उस समुदाय को जिसका यह विशेष हित

है, दिए गए प्रतिनिधित्व के हिस्से में से लिया जाए।