4. राज्य और अल्पसंख्यक - Page 189

172 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

  1. निर्वाचन - प्रणाली

(क) विधायी निकायों के लिए

(क) पूना समझौते से आरंभ की गई निर्वाचन - प्रणाली समाप्त कर दी जाएगी।

(ख) उसके स्थान पर पृथक निर्वाचक - मंडल की प्रणाली आरंभ की जाएगी।

(ग) मताधिकार प्रौढ़ मताधिकार होगा।

(घ) मतदान - प्रणाली संचयी होगी।

LFkk uh;

(ख) स्थानीय निकायों के लिए

नगरपालिकाओं और स्थानीय निकायों के लिए प्रतिनिधित्व की मात्रा निर्धारित करने

के सिद्धांत और निर्वाचन पद्धति वही होगी जो संघ राज्य विधानमंडलों के लिए अपनाई

गई हो।

खंड 2

कार्यपालिका में प्रतिनिधित्व का अधिकार (स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 210 - 211) कार्यपालिका में न्यूनतम प्रतिनिधित्व मिलेगा और यदि समूह संविधान होगा, समूह कार्यपालिका में उनका प्रतिनिधित्व 1. अनुसूचित जातियों को संघ और राज्य की

कुल जनसंख्या से उनकी जनसंख्या के अनुपात के बराबर होगा, परंतु किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को उसकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक प्रतिनिधित्व का दावा नहीं करने दिया जाएगा।

  1. जहां किसी विशाल बहुसंख्यक को एक उचित सीमा के भीतर रखना आवश्यक हो जाए, वहां अधि - प्रतिनिधित्व बहुसंख्यक समुदाय के हिस्से में से लिया जाएगा। किसी भी दशा में वह अन्य अल्पसंख्यक समुदाय की कीमत पर नहीं होगा।

  2. बहुसंख्यक के हिस्से में से निकाला गया अधि - प्रतिनिधित्व किसी एक समुदाय को ही नहीं दिया जाए, बल्कि वह सभी अल्पसंख्यकों में बराबर - बराबर अथवा -

(i) उनकी आर्थिक स्थिति, (ii) सामाजिक स्थिति और (iii) शैक्षिक प्रगति

के विलोम अनुपात में बांटा जाएगा।

खंड 3

ufèk Ro
d k
v fèk d k

देखिए, पृष्ठ, 211) (क) सेवाओं में अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व की मात्रा

निम्नलिखित रूप में होगी-

(i) संघीय सेवाओं में-भारत में या ब्रिटिश भारत में जो भी हो, कुल जनसंख्या से

उनकी जनसंख्या के अनुपात में,