राज्य और अल्पसंख्यक
173
(ii) राज्य और समूह सेवाओं में-राज्य या संघ में उनकी जनसंख्या के अनुपात में,
(iii) नगरपालिका और स्थानीय परिषदों की सेवाओं में-नगरपालिका और स्थानीय
परिषदों के क्षेत्रों में उनकी जनसंख्या के अनुपात में :
(क) परंतु किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय को सेवाओं में उसकी जनसंख्या
के अनुपात से अधिक प्रतिनिधित्व का दावा नहीं करने दिया जाएगा।
(ख) सेवाओं में प्रतिनिधित्व का उनका अधिकार न्यूनतम अर्हताओं, शिक्षा,
आयु, आदि संबंधी शर्तों के सिवाय कम नहीं किया जाएगा।
(ग) सेवाओं में प्रवेश के लिए विहित शर्तों के द्वारा 1942 और 1945 के
संकल्पों में भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों को दी गई रियायतों
में से किसी में कटौती नहीं की जाएगी।
(घ) रिक्तियों को भरने की पद्धति 1942 और 1945 के भारत सरकार के
संकल्पों में विहित नियमों के अनुरूप होगी।
(ङ) रिक्तियों को भरने के लिए गठित प्रत्येक लोक सेवा आयोग या समिति
पर अनुसूचित जातियों का कम से कम एक प्रतिनिधि होगा। भाग 2 विशेष उत्तरदायित्व
संयुक्त राज्य भारत अनुसूचित जातियों की प्रगति के लिए निम्नलिखित विशेष उत्तरदायित्वों को पूरा करने की जिम्मेदारी लेना :
खंड 1
उच्च शिक्षा के लिए उपबंध 1. संघ और राज्य सरकारों से यह अपेक्षा की जाएगी कि वे (स्पष्टीकरण के लिए अनुसूचित जातियों की उच्च शिक्षा की वित्तीय जिम्मेदारी अपने देखिए, पृष्ठ 211) ऊपर लें और अपने बजट में समुचित उपबंध करें। ऐसे उपबंध
संघ और राज्य सरकार के शिक्षा बजट पर प्रथम भार होंगे।
भारत में अनुसूचित जातियों की माध्यमिक और माविद्यालय शिक्षा के लिए धन जुटाने का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों पर होगा और विभिन्न राज्य कुल जनसंख्या से अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के अनुपात में उक्त प्रयोजन के लिए अपने वार्षिक बजटों में उपबंध करेंगे।
अनुसूचित जातियों की विशेष शिक्षा के लिए धन जुटाने को उत्तरदायित्व संघ सरकार पर होगा और संघ सरकार इस निमित्त अपने वार्षिक बजट में हर वर्ष दस लाख रुपये की व्यवस्था करेगी।
ये विशेष अनुदान राज्य के लोगों के लिए प्राथमिक शिक्षा के विकास में राज्य सरकार द्वारा किए जाने वाले व्यय में हिस्सा बांटने के अनुसूचित जातियों के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेंगे।