राज्य और अल्पसंख्यक
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(iv) मूल संकल्प उसी रूप में जिसमें वह पिछले विधान-मंडल द्वारा पारित किया
गया था, नव - निर्वाचित संघीय विधान-मंडल के उसी सदन में नए सिरे से
रखा जाएगा।
(v) संकल्प पारित किया गया नहीं समझा जाएगा, जब तक कि वह इस सदन
के सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से तथा अनुसूचित जातियों के दो तिहाई
सदस्यों से जो पृथक - पृथक निर्वाचक-मंडलों के जरिए विजयी रहे हों, पारित
न कर दिया जाए। भाग 4
देशी राज्यों में अनुसूचित जातियों का संरक्षण
संयुक्त राज्य भारत के संविधान में उपबंध किया जाएगा कि संघ में देशी राज्यों का प्रवेश निम्नलिखित शर्त के अधीन रहेगा :
(स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 215) 4 में अंकित अनुसूचित जातियों विषयक सभी उपबंधों का विस्तार देशी राज्यों की अनुसूचित जातियों तक किया जाएगा। संयुक्त राज्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 2 - अनुभाग
देशी राज्यों के संविधान में ऐसा उपबंध होना संघ में उनके प्रवेश की एक पूर्व शर्त होगी।
भाग 5 - निर्वचन
भाग 5
निर्वचन
अनुसूचित जातियां : एक अल्पसंख्यक (स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 215)
अनुसूचित जातियां : और निवास परिवर्तन (स्पष्टीकरण के लिए देखिए, पृष्ठ 215)
- भारत सरकार अधिनियम, 1935 के अधीन जारी किए गए भारत शासन अनुसूचित जाति आदेश, 1936 में यथा परिभाषित अनुसूचित जातियां अनुच्छेद 2 के प्रयोजनों के लिए अल्पसंख्यक समझी जाएगी।
- अनुच्छेद 2 के प्रयोजनों के लिए जाति एक राज्य में अनुसूचित है, वह संघ के सभी राज्यों में अनुसूचित जाति मानी जाएगी।
परिशिष्ट 1
स्पष्टीकरण टिप्पणी
उद्देश्यिका
उद्देश्यिका 22 जनवरी, 1947, यानि बुधवार को संविधान सभा द्वारा पारित उद्देश्यों विषयक संकल्प को संवैधानिक आकृति और स्वरूप प्रदान करती है।