178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
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भारत जैसे देश में जहां अधिसंख्य लोग सांप्रदायिक वृत्ति के हैं, यह आशा करना कठिन है कि जो लोग सत्ता में होंगे, उन लोगों के साथ समान व्यवहार करेंगे जो उनके संप्रदाय के नहीं हैं। भेदभावपूर्ण व्यवहार भारत के अस्पृश्यों के भाग्य में अपरिहार्य रहा है। मद्रास सरकार के राजस्व बोर्ड की कार्यवृत्त 723, तारीख 5 नवंबर, 1892 में से लिया गया निम्नलिखित अंश इस आसामान व्यवहार का एक उदाहरण पेश करता है, जो हिन्दू अधिकारियों द्वारा अनुसूचित जातियों के साथ किया जाता है। रिपोर्ट में लिखा है :
- प्रपीड़न के अनेक रूप हैं, जिनकी ओर तक इशारा भर किया गया है। उनका
उल्लेख कम से कम सरसरी तौर पर अवश्य किया जाना चाहिए। जैसे, पेरिया
द्वारा अवज्ञा किए जाने पर उनके मालिक उन्हें दंडित करने के लिए -
(क) ग्राम न्यायालय में या दंड न्यायालय में झूठे मुकदमे चलाते हैं।
(ख) परचेरी के चारों तरफ पड़ी बंजर भूमि आवेदन करके सरकार से प्राप्त कर
लेते हैं, ताकि पेरियों के पशुओं को पकड़ कर रखा जा सके तथा उनके
मंदिर जाने का मार्ग अवरुद्ध किया जा सके।
(ग) सरकारी खाते में परचेरी पर मिरासी नामों को कपटपूर्वक दर्ज करवा लेते
हैं।
(घ) झुग्गियों को गिरवा देते हैं और पिछवाड़े की फसल को नष्ट कर देते हैं।
(ङ) बहुत पुरानी शिकमी काश्तों में अधिभोग का अधिकार नहीं देते हैं।
(च) पेरियों की फसल बलपूर्वक काट लेते हैं। और मुकाबला करने पर उन पर
चोरी और दंगा करने का आरोप लगाते हैं।
(छ) गलत बयानी करके उनसे दस्तावेज लिखवा लेते हैं, जिनसे वे बाद में बर्बाद
हो जाते हैं।
(ज) उनके खातों का पानी रोक देते हैं।
(झ) कानूनी नोटिस के बिना जमींदार के बकाया लगान के लिए शिकमी काश्तकारों
की संपत्ति कुर्क करवा लेते हैं।
- लो़ग कहेंगे कि इन क्षतियों में से किसी के भी प्रतिकार के लिए सिविल और
दंड न्यायालय हैं। निससंदेह न्यायालय हैं, किन्तु भारत के गांव हेम्पडेन जैसे लोगों
को पनपने नहीं देते। लोगों में न्यायालय जाने का साहस होना चाहिए और उनके
पास वकील करने और कानूनी खर्च चुकाने के लिए धन, तथा मुकदमे और अपीलों
के लंबित रहते हुए जीविका के साधन अवश्य होने चाहिएं। साथ ही, अधिकांश
मुकदमे प्रथम न्यायालय के फैसले पर निर्भर करते हैं और इन न्यायालयों में वही
पदाधिकारी पीठासीन होते हैं, जो प्रायः भ्रष्ट होते हैं और जो अन्य कारणों से आमतौर
पर धनी और जमींदार वर्गों से सहानुभूति रखते हैं। वे भी उन्हें वर्गों के होते हैं।