राज्य और अल्पसंख्यक
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- पदाधिकारियों पर इन वर्गों के असर को बढ़ा - चढ़ाकर नहीं कहा जा सकता।
स्थानीय लोगों पर तो यह अत्यधिक होता ही है, यूरोपवासियों पर भी बहुत होता
है। छोटे - बड़े, सब कार्यलय इनके प्रतिनिधियों से भरे रहते हैं, और उनके हितों
को प्रभावित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। किन्तु शुरु से लेकर निष्पादन तक
की प्रक्रिया में वे उस पर काफी प्रभाव डाल सकते हैं।
पंजाब लैंड ऐलियनेशन ऐक्ट (पंजाब भूमि संक्रामण अधिनियम) विधान-मंडल द्वारा अस्पृश्यों के साथ आसमान व्यवहार का एक अन्य उदाहरण है।
हो सकता है, अन्य अनेक अल्पसंख्यक समुदायों को भी बहुसंख्यक समुदाय के हाथों ऐसे ही व्यवहार का शिकार होना पड़ता हो। अतः यह आवश्यक है कि ऐसा उपबंध बनाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि समस्त नागरिकों को विधियों, नियमों और विनियमों का समान फायदा मिले।
खंड 2 के उपबंध असमान व्यवहार से नीग्रो के संरक्षण के लिए संयुक्त राज्य अमरीका की कांग्रेस द्वारा पारित सिविल राइट्स प्रोटेक्शन एक्ट, 1866 तथा 1 मार्च, 1875 के अधिनियम से लिए गए हैं।
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यदि मूल अधिकारों को वास्तविक अधिकार बनाना है तो भेदभाव की बीमारी से बचाव करना जरूरी है। भारत जैसे देश में जहां भेदभाव विशाल पैमाने पर और निष्ठुर तरीकों से करना संभव है, मूल अधिकारों का कोई अर्थ नहीं हो सकता। इसका उपचार संयुक्त राज्य अमरीका की कांग्रेस में हाल ही में पुनःस्थापित विधेयक में अंगीकृत उपचारों पर आधारित है। उस विधेयक का उद्देश्य नीग्रो के सथ भेदपूर्ण आचरण का निवारण करना है।
खंड 4
इस खंड के पीछे मुख्य प्रयोजन राज्य पर यह दायित्व डालना है कि वह लोगों के आर्थिक जीवन को इस प्रकार योजनाबद्ध करे कि उससे उत्पादकता का सर्वोच्च बिन्दु हासिल हो जाए और निजी उद्यम के लिए एक भी मार्ग बंद न हो, और संपदा के समान वितरण के लिए भी उपबंध किया जाए। इस खंड के अंतर्गत वर्णित योजना के अनुसार कृषि के क्षेत्र में राजकीय स्वामित्व प्रस्तावित है, जहां सामूहिक पद्धति से खेतीबारी की जाए तथा उद्योग के क्षेत्र में राजकीय समाजवाद का रूपांतरित रूप भी प्रस्तावित है। इसमें कृषि एवं उद्योग के लिए आवश्यक पूंजी सुलभ कराने की बाध्यता राज्य के कंधों पर स्पष्ट रूप से डाली गई है। राज्य द्वारा पूंजी उपलब्ध कराए बिना कृषि या उद्योग से बेहतर परिणाम नहीं लिए जा सकते। इसमें यह भी प्रस्तावित है कि बीमा का दोहरे उद्देश्य से राष्ट्रीयकरण किया जाए। व्यक्ति को निजी बीमा फर्म की अपेक्षा राष्ट्रीयकृत बीमा से अधिक सुरक्षा मिलती है, क्योंकि उसके अंतर्गत राज्य के संसाधन व्यक्ति की बीमा राशि के अंतिम भुगतान की प्रतिभूति के रूप में गिरवी रहते हैं। साथ ही राज्य