186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
के शिकार की मदद करने की बजाए अत्याचार करने वाले को संरक्षण देता है।
इस पृष्ठभूमि में स्वराज्य का अस्पृश्यों के लिए क्या अर्थ हो सकता है? इसका एक ही अर्थ हो सकता है, अर्थात् इस समय तो केवल प्रशासन ही हिन्दुओं के हाथ में है, स्वराज के अंतर्गत विधान - मंडल और कार्यपालिका भी हिन्दुओं के हाथ में होंगे। यह कहने की जरूरत नहीं है कि इस तरह के स्वराज में अस्पृश्यों की तकलीफें बढ़ जाएंगी, क्योंकि विद्वेषपूर्ण प्रशासन के साथ उदासीन विधान - मंडल और लापरवाह सरकार भी होगी। परिणाम यह होगा कि कठोरता और विद्वेष में संयमहीन प्रशासन, विधान - मंडल और सरकार से अनियंत्रित रहकर अस्पृश्यों के प्रति अन्याय की नीति बिना किसी रोक - टोक के चलाएगा। दूसरे शब्दों में, स्वराज के अंतर्गत अस्पृश्य उस पतन की नियति से नहीं बच सकते, जो हिन्दुओं और हिन्दू धर्म ने उनके लिए निश्चित की है।
भारत में ब्रिटिश प्रणाली की सरकार बनाने के विरुद्ध ये विशेष तर्क हैं, जिनका उद्गम अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जातियों के हितों में है। किन्तु भारत में ब्रिटिश प्रणाली की सरकार बनाने के खिलाफ एक सामान्य तर्क भी है। इसमें संदेह नहीं कि ब्रिटिश प्रणाली की सरकार ने ब्रिटिश जनता को बहुत टिकाऊ प्रशासन दिया है। किन्तु प्रश्न यह है कि क्या भारत में भी यह स्थिर और टिकाऊ सरकार देगी। इसकी संभावना बहुत कम है। जातियों और धर्मों के बीच टकराव को देखते हुए यहां भारत के विधान - मंडल में अनेक पार्टियों और दलों का होना अनिवार्य है। यदि ऐसा हुआ तो संभव है, बल्कि निश्चित है कि इंग्लैंड जैसी संसदीय सरकार की प्रणाली के अंतर्गत, जहां विधान - मंडल में प्रतिकूल वोट होने पर सरकार त्यागपत्र दे देती है, भारत में सरकार की अस्थिरता की समस्या उत्पन्न होगी, क्योंकि दलों के लिए तुच्छ उद्देश्यों को लेकर बार - बार गठबंधन बनाने से सरकार को गिराना बहुत आसान होगा। तथाकथित बड़ी पार्टियों की एकता बनी रहने की संभावना नहीं रहेगी। वस्तुतः भारत में ब्रिटिश शासन का अंत होने पर इन पार्टियों को एक साथ रखने वाला तत्व खत्म हो जाएगा। लगातार सरकारों का गिराया जाना अराजकता से कम नहीं है। वर्तमान संविधान में धारा 93 इससे बचाव करती है, किन्तु स्वाधीन भारत के संविधान में धारा 93 अप्रासंगिक होगी। अतः धारा 93 का कुछ विकल्प खोजा जाना चाहिए।
इन सब बातों को देखते हुए इसमें संदेह नहीं कि ब्रिटिश प्रणाली की सरकार भारत के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त है।
उक्त धारा में प्रस्तावित कार्यपालिका निम्नलिखित प्रयोजन सिद्ध करेगी :
(i) अल्पसंख्यकों को भूमिका अदा करने का मौका नहीं मिलने पर बहुमत वाली
पार्टी को सरकार बनाने से रोकना।
(ii) बहुमत वाली पार्टी को प्रशासन पर एकांतित नियंत्रण से रोकना, ताकि बहुमत
का अल्पमत पर निरंकुश शासन संभव न हो।
(iii) बहुमत वाली पार्टी को सरकार में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों के रूप में
अपने आदमी, जिनको अल्पसंख्यकों का विश्वास प्राप्त न हो, शामिल करने
से रोकना।