4. राज्य और अल्पसंख्यक - Page 205

188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

के तथाकथित हमले से रक्षा करने के लिए कटिबद्ध होते हैं। पुलिस कार्रवाई के भय

सने सवर्ण वर्गों के हिंसा के प्रयोग पर अंकुश लगाया है और परिणामस्वरूप इस

तरह के मामले कभी - कभी ही होते हैं।

दूसरी कठिनाई दलित वर्गों की वर्तमान आर्थिक स्थिति में पैदा होती है। बंबई प्रांत

के अधिकांश भागों में दलित वर्गों को आर्थिक स्वाधीनता प्राप्त नहीं है। कुछ दलित

सवर्ण वर्गों की इच्छा से उनकी भूमि की काश्तकारी करते हैं, कुछ दलित लोग सवर्ण

वर्गों के खेत - मजदूरों के रूप में अर्जित आय पर गुजारा करते हैं और शेष गांव की

चाकरी के बदले सवर्णों से प्राप्त अनाज पर जीते हैं। हमारे सामने ऐसे अनेक उदाहरण

आए हैं, जब दलितों ने अपने अधिकारों का प्रयोग करना चाहा तो सवर्ण वर्ग ने उनके

खिलाफ अपनी आर्थिक शक्ति को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके या तो उन्हें

जमीन से बेदखल कर दिया या उन्हें काम देना बंद कर दिया या गांव की चाकरी

के बदले मिलने वाला पारिश्रमिक देना बंद कर दिया। यह बहिष्कार अक्सर इतने

व्यापक पैमाने पर किया जाता है कि दलित वर्गों को आम रास्तों का उपयोग करने

से रोका जाता है और गांव का बनिया उन्हें आवश्यक वस्तुएं बेचने से मना कर देता

है। उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार कभी - कभी मामूली कारण भी दलित वर्गों के खिलाफ

सामाजिक बहिष्कारों की घोषणा करने के लिए काफी होते हैं। अक्सर दलित वर्गों

द्वारा सार्वजनिक कुएं के उपयोग के अपने अधिकार के इस्तेमाल का प्रयास करने पर

उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया, किन्तु ऐसे उदाहरण भी कम नहीं हैं, जब कि

दलित वर्ग के किसी व्यक्ति द्वारा जनेऊ पहनने, जमीन का टुकड़ा खरीदने, अच्छे

गहने - कपड़े पहनने अथवा दूल्हे को घोड़ी पर बिठाकर आम सड़क से बरात ले जाने

के लिए उसका कठोरतापूर्वक बहिष्कार किया गया।

यह बात 1928 में कही गई थी। यह न समझें कि वह दौर अब खत्म हो गया है। अतः मैं पंजाब के खेरी जेसोर गांव के अस्पृश्यों की याचिक यहां दे रहा हूं, जो फरवरी 1947 में रोहतक जिले के डिप्टी कमिश्नर को संबोधित है, जिसकी एक प्रति मुझे मिली है। याचिका इस प्रकार हैं :

प्रेषक

अनुसूचित जातियों के लोग (चमार)

गांव खेरी जेसोर, तहसील व जिला, रोहतक

सेवा में,

डिप्टी कमिश्नर

रोहतक जिला, रोहतक

महोदय,

हम खेरी जेसोर गांव के अनुसूचित जाति (चमार) के अधोलिखित लोग आपका ध्यान गांव के सवर्ण हिन्दू जाटों के निर्दयी व्यवहार के कारण उत्पन्न अपनी मुश्किलों की तरफ आकृष्ट करना चाहते हैं।