4. राज्य और अल्पसंख्यक - Page 213

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

काम अल्पसंख्यक वर्ग को विधान - मंडल में वास्तविक प्रतिनिधि भेजने में समर्थ

बनाना है। चूंकि यह अल्पसंख्यक वर्ग को संरखण देने की व्यवस्था है, अतः

पृथक अथवा संयुक्त निर्वाचक - मंडल का फैसला अल्पसंख्यक वर्ग पर ही छोड़

दिया जाना चाहिए।

(ii) वे बहुसंख्यक समुदाय द्वारा पृथक निर्वाचक - मंडल की मांग और अल्पसंख्यक

समुदाय द्वारा पृथक निर्वाचक-मंडल की मांग में भेद नहीं कर पाते हैं।

बहुसंख्यक समुदाय को पृथक निर्वाचक - मंडल की मांग करने का कोई अधिकार

नहीं है। कारण सीधा है। बहुसंख्यक समुदाय द्वारा पृथक निर्वाचक - मंडल

की मांग का अर्थ है बहुसंख्यक समुदाय द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय पर बिना

उसकी सहमति के अपना शासन स्थापित करने का अधिकार। यह लोकतंत्र

के इस सुस्थापित सिद्धांत के विपरीत है कि शासन शासित की सहमति से

चले। इससे विपरीत सिद्धांत से, अर्थात् अल्पसंख्यक समुदाय को अपने हित

के अनुरूप निर्वाचक - मंडल निर्धारित करने का अधिकार है, कोई बुरा परिणाम

नहीं निकलता, क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय बहुसंख्यक समुदाय पर शासन

करने की स्थिति में कभी नहीं आएगा।

  1. सारे सवाल के प्रति सही रवैया निम्नलिखित स्वयंसिद्ध तथ्यों पर आधारित होगाः

(i) चूंकि निर्वाचक - मंडल की प्रणाली का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय को संरक्षण

प्रदान करना है, अतः निर्वाचक - मंडल संयुक्त हो अथवा पृथक, इसका फैसला

अल्पसंख्यक समुदाय की इच्छा पर छोड़ दिया जाना चाहिए। यदि अल्पसंख्यक

समुदाय इतना बड़ा है कि वह बहुमत को प्रभावित कर सकता है, तो वह

संयुक्त निर्वाचक - मंडल को चुनेगा। यदि वह इतना छोटा है कि बहुमत को

प्रभावित न कर सके, तो वह अपनी अस्मिता के खो जाने के डर के कारण

पृथक निर्वाचक - मंडल को चुनेगा।

(ii) बहुसंख्यक समुदाय चूंकि शासन करने की स्थिति में होता है, अतः निर्वाचक -

मंडल का स्वरूप निर्धारण करने में उसकी कोई आवाज नहीं होनी चाहिए।

यदि अल्पसंख्यक समुदाय संयुक्त निर्वाचक - मंडल चाहता है, तो बहुसंख्यक

समुदाय को संयुक्त निर्वाचक - मंडल मान लेना चाहिए। यदि अल्पसंख्यक

समुदाय पृथक निर्वाचक - मंडल चाहता है, तो बहुसंख्यक समुदाय उसे देने से

इंकार नहीं कर सकता। दूसरे शब्दों में बहुसंख्यक समुदाय को इस संबंध में

अल्पसंख्यक समुदाय का निर्णय मान लेना चाहिए।

भाग 1 - खंड 2 भाग 1

खंड 2

यह मांग पूना समझौते से बाहर लग सकती है, क्योंकि उसमें इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन यह सही नहीं होगा। वास्तव में, यदि उसमें कोई प्रावधान नहीं