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राज्य और अल्पसंख्यक

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तक अध्यक्ष पद पर बना रह सकता है, भले ही आम निर्वाचनों में राजनीतिक दलों की जो स्थिति रहे। ओटावा में हर नई लोकसभा (हाउस ऑफा कॉमन्स) के लिए नया अध्यक्ष होता है और लंबे समय से यह परंपरा है कि एक राजनीतिक दल दो या तीन विधान-मंडलों की अवधि में सत्ता पर बना रहता है, तो एक विधान - मंडल का अध्यक्ष अगर ब्रिटिश कनाडियन हुआ तो दूसरी का फ्रेंच कनाडियन होगा। यह भी नियम है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद एक ही समय में एक ही नस्ल के सदस्यों के पास नहीं रहेगा। यदि अध्यक्ष फ्रेंच कनाडियन है, तो उपाध्यक्ष जो समितियों का सभापति भी होता है, अंग्रेजी भाषी कनाडियन होगा, क्योंकि सदन का नियम है कि उपाध्यक्ष के पद पर चुने गए व्यक्ति को उस भाषा की पूरी और व्यावहारिक जानकारी होनी चाहिए, जो उस समय अध्यक्ष पद पर काम कर रहे व्यक्ति की नहीं है।

सदन के लिपिक और सहायक लिपिक के पद और सार्जेंट - ऐट - आर्म्स तथा उपसार्जेंट - ऐट - आर्म्स के पद-सभी निर्वाचित पदों से भिन्न नियुक्ति वाले पद-इसी तरह प्रथा के अनुसार दोनों नस्लों में विभाजित हैं।

संसद के दोनों सदनों से संबंधित महत्वपूर्ण और गैर - महत्वपूर्ण पद इन नियमों और प्रचलनों के अनुसार वितरित हैं। दोनों सदनों के कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी में, जिसमें चपरासियों तक के नाम होते हैं, जितने अंग्रेजी भाषी कनाडियनों के नाम मिलेंगे, उतने ही फ्रेंच भाषी कनाडियनों के नाम मिलेंगे। ये नियम और प्रचलन जिनके अनुसार पदों का वितरण होता है, कनाडा महासंघ से भी ज्यादा पुराने हैं। ये युनाइटेड प्रोविन्सेस (संयुक्त प्रांतों) के प्रारंभिक वर्षों के हैं, जब क्यूबेक और ओंटारिया समान संख्या में सदस्य संसद में भेजते थे और जब कनाडा संघ के यही दो प्रांत थे।

क्यूबेक इस समय लोकसभा (हाउस ऑफ कॉमन्स) के कुल 234 सदस्यों में से 65 सदस्य चुनता है। इसकी जनसंख्या कनाडा औपनिवेशिक राज्य की कुल जनसंख्या का एक चौथाई नहीं है। इसके राजस्व का हिस्सा औपनिवेशिक राज्य के एक बटा छह से अधिक नहीं है। किन्तु लोक सभा के पदों का समान विभाजन क्यूबेक द्वारा अपने अधिकारों और विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है। जब तक कोई राजनीतिक दल सत्ता में रहते हुए फ्रेंच कनाडा के समर्थन पर निर्भर होता है, तब तक उसके लिए संसदीय सम्मान और पदों के क्यूबेक के दावे की उपेक्षा करना उतना ही कठिन होगा, जितना पृथक प्रणालियों को सुरक्षित करने वाली ब्रिटिश नार्थ अमरीका ऐक्ट की धारा को निरस्त करना।

दुर्भाग्य से भारत के अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भारतीय राष्ट्रवाद के एक नया