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राज्य और अल्पसंख्यक

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भाग 5 - निर्वचन

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भाग 5

अनुसूचित जातियां अल्पसंख्यक समुदाय हैं या नहीं, यह विवाद का विषय बन गया है। पहल प्रावधान का उद्देश्य इस विवाद को खत्म करना है। अनुसूचित जातियां भारत के किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय की तुलना में बुरी स्थिति में हैं। अतः उन्हें अन्य अल्पसंख्यकों से भी ज्यादा संरक्षणों की जरूरत है। इस संबंध में जो कम से कम किया जा सकता है, वह यह है कि उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय माना जाए।

दूसरे प्रावधान का उद्देश्य प्रांतीय बाधा को दूर करना है। कोई कारण नहीं है कि एक प्रांत के अनुसूचित जाति के नागरिक को केवल इसलिए संविधान द्वारा दिए गए राजनीतिक विशेषाधिकारों का लाभ खोना पड़े कि उसने अपना निवास स्थान बदल लिया है।

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परिशिष्ट 2

पूना समझौते का मूलपाठ

  1. प्रांतीय विधामंडलों में सामान्य निर्वाचक - मंडल की सीटों से निम्न प्रकार से दलित वर्गों के लिए सीटें आरक्षित होंगी :

मद्रास 30

बंबई सिंध सहित 15

पंजाब 8

बिहार और उड़ीसा 18

मध्य भारत 20

आसाम 7

बंगाल 30

संयुक्त प्रांत 20

कुल 148

ये आंकड़े प्रधानमंत्री के निर्णय में घोषित प्रांतीय परिषदों की कुल सदस्य - संख्या पर आधारित हैं।