202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
- इन सीटों के लिए निर्वाचन संयुक्त निर्वाचक - मंडल की प्रणाली से होंगे और यह निम्नलिखित कार्यविधि के अधीन होंगे :
निर्वाचन - क्षेत्र की सामान्य मतदाता सूची में दर्ज दलित वर्गों के सभी सदस्य
निर्वाचक - मंडल में होंगे, जो एकल वोट की विधि से प्रत्येक आरक्षित सीट के
दलित वर्गों के चार उम्मीदवारों का पैनल चुनेंगे। इस तरह के प्राथमिक निर्वाचन
में सबसे अधिक वोट प्राप्त करने वाले चार उम्मीदवार सामान्य मतदाताओं
द्वारा निर्वाचन के उम्मीदवार होंगे।
केन्द्रीय विधान-मंडल में दलित वर्गों के प्रतिनिधि भी इसी तरह आरक्षित सीटों और संयुक्त निर्वाचक - मंडल की प्रणाली से प्राथमिक निर्वाचन की विधि से उसी रीति चुने जाएंगे, जो ऊपर खंड 2 में प्रांतीय विधान-मंडलों के प्रतिनिधि के लिए दी गई है।
केन्द्रीय विधान-मंडल में ब्रिटिश भारत के सामान्य निर्वाचक - मंडल के लिए नियत कुल सीटों की 18 प्रतिशत सीटें दलित वर्गों के लिए आरक्षित होंगी।
केन्द्रीय और प्रांतीय विधान-मंडल के निर्वाचन के लिए उम्मीदवारों के पैनल के लिए प्राथमिक निर्वाचन - प्रणाली प्रथम दस वर्ष बाद खत्म हो जाएगी, बशर्ते कि आगे
खंड 6 के प्रावधान के अंतर्गत आपसी समझौते से उसे पहले ही समाप्त न कर दिया जाए।
प्रांतीय और केन्द्रीय विधान-मंडलों में आरक्षित सीटों द्वारा दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व की प्रणाली जिसकी व्यवस्था खंड 1 से खंड 4 में की गई है, समझौते से संबद्ध समुदायों के बीच आपसी करार से निश्चित तारीख तक चलती रहेगी।
केन्द्रीय और प्रांतीय विधान-मंडलों के लिए दलित वर्गों का मताधिकार वही होगा, जो लोथियन समिति की रिपोर्ट में दिया गया है।
स्थानीय निकायों के निर्वाचन या सरकारी सेवाओं की नियुक्ति के लिए दलित वर्गों का सदस्य होने की वजह से किसी व्यक्ति के साथ कोई अशक्तता नहीं जुड़ेगी। इनमें दलित वर्गों को उन शैक्षिक योग्यताओं के अधीन जो सरकारी सेवाओं की नियुक्ति के लिए निर्धारित हों, उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए पूरी कोशिश की जाएगी।
प्रत्येक प्रांत शिक्षा अनुदान में से पर्याप्त राशि दलित वर्गों के सदस्यों को शैक्षिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आबंटित की जाएगी।