238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
खातेदार को उसकी मूल जोतों के अनुपात में यथासंभव उसी मूल्य का एक प्लाट दे दिया जाए। इस तरीके में किसी भी खातेदार को भूमि से वंचित नहीं किया जाता। हर किसी को जमीन मिल जाती है और उसे अपनी छोटी - छोटी बिखरी हुई जोतों की जगह उनके कुल क्षेत्रफल के लगभग बराबर एक प्लाट मिल जाता है। केवल बहुत थोड़े से ही लोग ऐसे हो सकते हैं, जिनकी जोतें इतनी छोटी हों कि उन्हें किसान बनाए रखना उचित नहीं होगा और उन्हें अपनी भूमि खो देनी पड़े। परंतु इस तरह उन्हें भी फायदा होगा, क्योंकि उन्हें भी अपनी थोड़ी - सी भूमि के पूरे पैसे मिल जाएंगे।
बड़ौदा कमेटी ने दूसरे तरीकों को पसंद किया है, क्योंकि :
यह उस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी को भी सिवाय उन थोड़े से लोगों के जिनकी जमीन बहुत ही कम थी, जमीन से वंचित नहीं किया जाता। इस तरह छोटे से आदमी को भी अपनी दशा सुधारने का मौका मिलेगा। भूमि के हर मालिक को भूमि का एक नया सुसंयत प्लाट मिल जाएगा, जिसका मूल्य उसकी छोटी - छोटी और बिखरी हुई जोतों के अनुपात में होगा। इस तरह पिछले उप - विभाजन और उनसे जुड़ी हुई बुराइयां खत्म हो जाएंगी। ख्7,
चकबंदी के बारे में प्रो. एच.एस. जेवन्स का कथन है :
गांवों के पुनर्गठन के तरीके का चुनाव हमें जिन सिद्धांतों के आधार पर करना चाहिए, वे नीचे वर्णित हैं। पहली बात तो यह है कि जहां तक हो सके अनिर्वायता से बचना चाहिए और यह सिद्धांत अपनाना चाहिए कि जब तक किसी क्षेत्र के आधे से अधिक क्षेत्रफल के मालिक परिवर्तन की मांग न करें, वहां कोई परिवर्तन थोपा न जाए। जब किसी क्षेत्र में यह शर्त पूरी हो जाए, तब यह होगा कि सरकारी देखभाल में चकबंदी स्वीकार करने के लिए विवश किया जाए। दूसरे, इस काम पर होने वाला व्यय यथासंभव कम से कम रखा जाए। तीसरे, विभिन्न स्थानों में पहले कुछ वर्षों में पुनर्गठन के काम में पर्याप्त लचीलापन रखा जाए। चूंकि यह उपक्रम प्रायोगिक चरण में होगा, इसलिए अलग - अलग उपाय अपना कर देखे जा सकते हैं और उनमें से जो सर्वोत्तम लगे, उसे अंततोगत्वा स्थायी नियम बनाने के लिए चुना जा सकता। चौथे, हो सकता है कि पुनर्गठित गांवों में वर्तमान काश्तकारी कानून में पर्याप्त परिवर्तन करने की जरूरत अनुभव की जाने लगे। बात पूरी करने के लिए मैं पांचवे सिद्धांत को भी जोड़ना चाहूंगा कि भूमि का पुनर्वितरण यथासंभव अधिकतम न्यायोचित आधार पर किया जाए और जिन्हें किन्हीं कारणों से जमीन की पिछली मिल्कियत न दी जा सके, उन्हें उदारपूर्वक मुआवाजा दिया जाए। ख्8,
बड़ौदा कमेटी रिपोर्ट, पृष्ठ 35
द कंसोलिडेशन आफ एग्रीकल्चरल होल्डिंग्स इन द यूनाइटेड प्रोविन्सेज, 1918, पृष्ठ 45 - 46, लेखक का प्रो. जेवन्स को आभार।