भारत में छोटी जोतों की समस्या और उसका निवारण 241
सभी व्यक्ति सहमत हैं, तो भूमि की रजिस्ट्री कर ली जाती है। जो भूमि पूरी
तरह सरकार के अधिकार में है, उसकी रजिस्ट्री बिना जांच के हो सकती है।
किसी भी दशा में जोत की रजिस्ट्री केवल एक नाम से ही होगी और रजिस्ट्री
की इस कार्रवाई के बाद रजिस्टर्ड मालिक के अतिरिक्त और सभी लोगों का
हिस्सा भूमि में समाप्त हो जाता है। इसके बाद मालिक उस प्लाट का बंटवारा
नहीं कर सकता और जब तक वह इसका मालिक बना रहता है, उसे समसूचा
प्लाट अपने पास रखना पड़ेगा। वह केवल समूचे प्लाट को बेच सकता है,
उसे गिरवरी रख सकता है या उसका निपआरा कर सकता है, परंतु उसके
किसी अंश का निपटारा नहीं कर सकता, न ही कोई ऐसा काम कर सकता है,
जिससे जोत का बंटवारा हो। जोत के मालिक की मृत्यु के बाद, यदि उसने
उसके बंटवारे में कोई वसीयत नहीं छोड़ी तो वह केवल एक ही उत्तराधिकारी
की ही मिलेगी। यदि इस विधेयक के उपबंधों का उल्लंघन होता है (उदाहरण
के लिए यदि मालिक जोत का एक भाग गिरवी रख दे अथवा बंधनकर्ता उसे
रखने के लिए डिक्री हासिल कर लेता है) तो कलेक्टर को यह अधिकार है
कि वह अदालत में एक प्रमाण - पत्र भेजे और अदालत डिक्री या आदेश को
रद्द कर देगी। जिस व्यक्ति ने गलत कब्जा किया हुआ है, कलेक्टर उसे भी
बेदखल कर सकता है। जब एक प्लाट को लाभकारी जोत बना दिया जाता
है, तो बिना कलेक्टर की सहमति के उसके रजिस्ट्रेशन को रद्द नहीं किया जा
सकता। जिन कारणों के आधार पर रजिस्ट्रेशन को रद्द किया जा सकता है,
वे नियमों में वर्णित होंगे और ऐसा प्रस्ताव है कि वह तभी रद्द किया जाएगा,
जब आर्थिक कारणों से ऐसा करना जरूरी हो।
चकबंदी के इन दो प्रश्नों पर हुए विचार - विमर्श को संक्षेप में बताते हुए कहा जा सकता है कि इसके समर्थकों ने समस्या पर कभी समूचे रूप में विचार नहीं किया। केवल बड़ौदा कमेटी ने इस बात की चेष्टा की है कि चकबंदी भी की जाए और उस चकबंदी को बरकरार भी रखा जाए। प्रो. जेवन्स ने चकबंदी के परिणामों को संरक्षित रखने पर कोई ध्यान नहीं दिया। श्री कीटिंग ने चकबंदी के प्रश्न की चर्चा ही नहीं की। उन्होंने केवल इस बात पर ध्यान दिया है कि भूमि के और अधिक विखंडन की रोकथाम की जाए। पर जोत की लाभकारी जोत के रूप में प्रविष्टि होने के बाद भी उसका विखंडन हो सकता है। उनके उपायों से तो जोतें उसी रूप में बनी रहेंगी, जैसे वे रजिस्ट्री के समय थीं, अर्थात् वह उनका आकार कम नहीं होने देंगी। पर साथ ही वे छोटी - छोटी और बिखरी हुई रहेंगी। अपने कानून के बावजूद श्री कीटिंग स्थिति को उसी रूप में रहने देना चाहते हैं, जिस रूप में वह विद्यमान है। वास्तविक चकबंदी का लक्ष्य तो प्रो. जेवन्स और बड़ौदा कमेटी ने अपने सामने रखा है। इसके लिए वे जिन सिद्धांतों की चर्चा करते हैं, वे करीब - करीब एक से हैं। इसी तरह उन्हें लागू करने की प्रक्रियाएं भी एक जैसी हैं।
चकबंदी की गई जोतों के संरक्षण के लिए श्री कीटिंग भी और बड़ौदा कमेटी भी