5. भारत में छोटी जोतों की समस्या और उसका निवारण - Page 259

242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

उत्तराधिकार के लिए एक व्यक्ति का नियम बनाते हैं। बड़ौदा कमेटी इस नियम को तभी अपनाना चाहेगी, जब जमीन के बंटवारे से जोतें अलाभकारी बनें और फिर वह उत्तराधिकारी को इस बात के लिए विवश करें कि वह बेदखल किए गए उत्तराधिकारियों के दावों को भी खरीद ले। श्री कीटिंग बेदखल किए गए उत्तराधिकारियों को कोई मुआवजा नहीं देना चाहते।

चकबंदी की इन योजनाओं के बारे में एक गंभीर आपत्ति यह है कि उन्होंने इस बात का महत्व नहीं समझा कि चकबंदी की गई भूमि का टुकड़ा बड़े आकार का भी होना चाहिए। यदि यह कहा जाता है कि भारत में कृषि छोटी - छोटी और बिखरी हुई जोतों के अभिशाप से ग्रसत है, तो न केवल यह जरूरी है कि उनकी चकबंदी की जाए, बल्कि यह भी जरूरी है कि उनका आकार बड़ा किया जाए। यह बात हमेशा दिमाग में रखनी चाहिए कि चकबंदी से भूमि के बिखरे होने की बुराइयां तो दूर हो जाएंगी, परंतु यह छोटी जोतों की बुराई दूर नहीं कर सकती, जब तक कि जोत आर्थिक दृष्टि से लाभकारी, अर्थात बड़े आकार की न हो। बड़ौदा कमेटी और श्री कीटिंग समस्या के इस पहलू को पूरी तरह अनदेखा कर गए। केवल प्रो. जेवन्स ने ही इस बात को बराबर ध्यान में रखा कि चकबंदी के साथ - साथ जोतों का आकार भी बड़ा किया जाना चाहिए।

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यह मानकर चला जा सकता है कि जोतों का आकार बड़ा करना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उनकी चकबंदी। इसलिए अब हम उसके आधार के नियमन पर विचार करेंगे। हमारी कृषि में रुचि रखने वाले सभी लोगों की यह इच्छा है कि हमारी जोतें आर्थिक दृष्टि से लाभकारी हों। जिन लोगों ने हमें यह परिशुद्ध और वैज्ञानिक शब्दावली प्रदान की है, यदि वे यह भी बता देते कि लाभकारी जोत की परिभाषा क्या है, तो हम उनके अधिक कृतज्ञ होते। दूसरी ओर यह विश्वास किया जाता है कि बड़े आकार की जोत लाभकारी जोत होती है। यह कहा जा सकता है कि प्रो. जेवन्स भी इसी धारणा के शिकार हो गए हैं, क्योंकि जब वह जोत के आकार की बात करते हैं, तो वह प्रायः हठधर्मी के रूप में कहते हैं कि गांव में बहुलक औसत 29 और 30 एकड़ के बीचम में होना चाहिए। ख्11, परंतु यह औसत 100 या 200 एकड़ क्यों नहीं होना चाहिए। शायद प्रो. जेवन्स इसका यह उत्तर देते कि वह इतने एकड़ की जोत का समर्थन सइलिए करते हैं कि इतनी भूमि से किसान का जीवनस्तर पहले से अधिक ऊंचा हो जाएगा। प्रो. जेवन्स ने अपने पेम्फलेट में भारत में रहन - सहन के स्तर को ऊंचा करने के तार को पकड़ कर जरूरत से कहीं ज्यादा खींचा है। ख्12, उनके इस सिद्धांत में जो त्रुटि हैं, उस पर हम बाद में विचार करेंगे।

  1. प्रासंगिक उद्धरण, पृष्ठ 38 पर