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भारत में छोटी जोतों की समस्या और उसका निवारण 249

जहां कुओं से सिंचाई की जाती है, वहां सिंचाई भी कम की जाने लगी है।

  1. जहां तक हल चलने वाले पशुओं का सवाल है, आंकड़ां से पता चलता है

कि दुर्भिक्ष का कितना भीषण प्रभाव पड़ा है। इसका एक अपरिहार्य प्रभाव सदा यह

पड़ता है कि पशुओं की संख्या घटा दी जाती है, पर यदि परिस्थितियां अनुकूल

हों तो कुछ वर्षों में स्थिति सामान्य हो जाती है। अद्यतन वर्ष (1908 - 09) में हल

चलाने वाले पशुओं की जो संख्या वक्तव्य में दी गई है, वह कुछ क्षेत्रों में शुरू के

वर्ष (1893 - 94) के मुकाबले कम है, अर्थात् आसाम, बुंदेलखंड, आगरा प्रांत - उत्तर

और पश्चिम, गुजरात, दक्कन, बरार, मद्रास - उत्तरी और मद्रास - पश्चिमी। यद्यपि

इन आंकड़ों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, पर इन आंकड़ों से यह

तो पता चलता ही है कि हल चलाने वाले पशुओं की कमी है।

पूंजी के बारे में श्री इलियट जेम्स का कथन है :

रैय्यत इस बारे में पैनी नजर रखते हैं कि मॉडल फार्मों पर दिखाई गई अच्छी ढंग

से की गई खेती के बढि़या परिणाम निकलते हैं, परंतु वे इस जानकारी से ज्यादा

लाभ नहीं उठा सकते, भले ही वह अच्छी तरह समझते हैं कि बेहतर काश्तकारी

और उचित ढंग से खाद देने का मतलब है फसल की ज्यादा पैदावार। उनकी

बड़ी जरूरत है पूंजी। ख्22,

इसी लेखक का कहना हैकि किसान जानता है कि उसके कृषि के औजार अकुशल और पुराने ढंग के हैं, परंतु वह उनकी जगह बेहतर औजारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, क्योंकि ‘बढि़या किस्म के पशुओं और खेती के बेहतर औजारों के लिए जरूरी है कि इतना खर्च किया जाए, जितना कि उसके पास धन नहीं है।’

ऐसे ही तथ्य बड़ौदा राज्य के वाणिज्यि और उद्योग निदेशक श्री एम. बी. नानावती ने एक और संदर्भ में एकत्र किए हैं। श्री नानावती जोतों की चकबंदी वाली समिति के सदस्य थे, परंतु खेद की बात है कि अपनी इस जानकारी का उपयोग उन्होंने इस समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों में नहीं किया। शायद उनका विचार है कि जोत के आकार का उत्पादन के औजारों से कोई संबंध नहीं। वह खेद प्रकट करते हुए लिखते हैं :

किसानों के पास भार - वाहक और ढेर पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। आज (1913 में)

उनके पास 8,34,901 बैल आदि हैं, अर्थात् 36 बीघे की खेती के लिए एक जोड़ी

बैल। बैलों की एक अच्छी जोड़ी औसतन 25 बीघे में हल चला सकती है। परंतु

वर्तमान नस्ल तो बहुत घट गई है और एक जोउत्री बैल अधिक से अधिक 20

बीघे में हल चला सकती है, जब कि वर्तमान वास्तविक औसत 36 बीघे है। इन

परिस्थितियों में इस बात की संभावना नहीं है कि हल गहराई में चलाया जा सके।

जमीन की ऊपर सतह को केवल खुरच भर दिया जाता है। छोटे किसानों के

  1. इंडियन इंडस्ट्रीज, पृष्ठ 6