250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
पास तो हल चलाने वाले पशु होते ही नहीं या एक ही बैल होता है। इसलिए उन
किसानों को अपने दोस्तों से बैल लेकर काम चलाना होता है, जिनकी स्थिति उनसे
बेहतर नहीं होती। जहां तक खेती के औजारों का प्रश्न है राज्य में 1,54,364 हल
हैं, अर्थात् दो खातेदारों के पीछे एक। यहां पर यह समझ लेना चाहिए कि खेतिहर
किसानों और काश्तकारों की संख्या तीन लाख से कहीं अधिक है और उनमें से
प्रत्येक को पूरे उपकरणों की जरूरत होती है। इसलिए वास्तविक औसत ऊपर
दिए गए औसत से भी कम बैठेगा। ख्23,
वास्तव में 1898 के बाद रियासत में कृषि उत्पादन के उपकरणों की दशा बहुत बिगड़ी है, जैसा कि नीचे दी गई सारणी से स्पष्ट होता है :
वर्ष हल गाडि़यां हल चलाने वाले पशु अन्य पालतू पशु
1898 1,75,989 - - 4,15,089 5,70,517
1910 1,51,664 68,946 3,34,801 5,09,416
इस स्थिति में क्या यह कहना उचित नहीं होगा कि वर्तमान उपकरण न केवल आकार बढ़ाई गई जोतों के लिए अपर्याप्त हैं, बल्कि वर्तमान छोटी - छोटी जोतें भी जमीन के अतिरिक्त, उत्पादन के अन्य साधनों के मुकाबले बहुत बड़ी हैं। हमारे इस सिद्धांत के अनुसार तो निष्कर्ष यह निकलता है कि वर्तमान जोतें अलाभकारी हैं, पर इसलिए नहीं कि वे बहुत छोटी हैं, बल्कि इसलिए कि वे बहुत बड़ी हैं। तब क्या हमें यह तर्क देना चाहिए कि वर्तमान जोतों का आकार और कम कर दिया जाए, ताकि वे हमारे विचार के मुताबिक लाभकारी हो सकें। बेखबर पाठक शायद यह सोचने लगें कि यही तर्कसंगत और अपरिहार्य निष्कर्ष निकलता है - एक ऐसा निष्कर्ष जो कि आश्चर्यजनक रूप से देश में जनमत के बिल्कुल विपरीत है। निस्संदेह यह निष्कर्ष बिल्कुल विपरीत है, परन्तु यह अपरिहार्य नहीं। ऊपर हमने जो भूमिका बांधी है, उसके आधार पर हम यह तर्क दे सकते हैं कि कृषि के लिए पशुओं और औजारों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है, जिसके फलस्वरूप जोतों का आकार बढ़ाने की आवश्यकता भी पड़ जाएगी।
फलतः हम कह सकते हैं कि भारत में कृषि की खामियों को दूर करने के लिए बुनियादी तौर पर जोतों का आकार बढ़ाने की जरूरत नहीं, बल्कि पूंजी और पूंजीगत सामान बढ़ाने की जरूरत है। यह बात अर्थशास्त्र में आमतौर पर कही जाती है कि पूंजी बचत से प्राप्त होती है और बचत तब संभव है, जब हमारे पास अधिक (सरप्लस) फसल हो।
क्या कृषि से, जो हमारी जनता का मुख्य धंधा है, हमें बेशी (सरप्लस) फसल मिलती है? इसका सर्वसम्मत उत्तर होगा - नहीं, और हम उससे सहमत हैं। हम उन उपायों से
- रिपोर्ट आन एग्रीकल्चरल इन्डेटेडनैस इन द बड़ौदा स्टेट, 1913, पैरा 35