भारत में छोटी जोतों की समस्या और उसका निवारण 255
परंतु यदि आकार बड़ा करना संभव नहीं है तो क्या हम चकबंदी भी नहीं कर सकते? यह दर्शाया जा सकता है कि वर्तमान सामाजिक अर्थव्यवस्था में तो चकबंदी भी संभव नहीं है। चकबंदी वाली जोतों का उप - विभाजन और विखंडन रोकने के लिए अपनाए गए उपाय से वास्तविक राहत नहीं मिल सकती। यह तो केवल कानूनी तौर पर आंखें पोंछने के समान होगा। इस बात को अच्छी तरह समझना तब आसान होगा, जब हम यह समझ लेंगे कि एक व्यक्ति-उत्तराधिकार के नियम के व्यवहार से क्या मतलब निकलता है। उसके लिए हमें सर्वे रिकार्ड में किए जाने वाले परिवर्तनों को नोट करना पड़ेगा। आजकल के बंबई भू - राजस्व संहिता अध्याय 1, अनुभाग 3, खंड 6 के अनुसार : ‘सर्वे नंबर का अर्थ जमीन का एक ऐसा भाग है, जिसका क्षेत्रफल और अन्य जानकारी अलग से प्रविष्ट की जाती है और उसे गांव के कस्बे या शहर के सर्वे रिकार्ड में एक अलग नंबर दिया जाता है, जिसमें वह अवस्थित होता है और इसमें सर्वे नंबर का एक एकीकृत हिस्सा होता है।’
इसके अतिरिक्त खंड 7 के अनुसार, ‘सर्वे नंबर के स्वीकृत हिस्से ’ का अर्थ होता है सर्वे नंबर के उक उप - विभाजन से, जिसका अलग से मूल्यांकन किया गया है और पंजीकृत किया गया है।
एक व्यक्ति - उत्तराधिकार नियम के अपनाए जाने के बाद जमीन के एक टुकड़े को एक सर्वे नंबर दिया जाएगा, जिसका आकार आदर्श लाभकारी जोत के निर्धारित आकार के बराबर होगा। दूसरे, यह जरूरी होगा कि ऐसे सर्वे नंबर के किसी उप - विभाजन का अलग से रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया जाए, अर्थात् यदि जमीन के किसी टुकड़े का रजिस्ट्रेशन करके उसे अलग से विशिष्ट सर्वे नंबर देना है, तो उसका आकार लाभकारी जोत की सीमा से कम न हो। यह सर्वे नंबर जिसके अंतर्गत इतने बड़े आकार की जोत होगी जिसे लाभकारी कहा जा सके, उसका भी रजिस्ट्रेशन केवल एक व्यक्ति के नाम में होगा। यदि हम बड़ौदा कमेटी की परियोजना को अमल में लाएं, तो बिल्कुल ऐसा होगा। श्री कीटिंग एक बड़े आकार की इकट्ठी जोत को एक सर्वे नंबर देने की जगह एक व्यक्ति के नाम में कई सर्वे नंबर देंगे, जिसमें एक इकाई के अंतर्गत जमीन के छोटे और बिखरे हुए टुकड़े होंगे। श्री कीटिंग की योजना से कोई व्यावहारिक हल नहीं निकलता, इसलिए उसे त्यागना पड़ेगा। तब एक व्यक्ति - उत्तराधिकार नियम एक समेकित जोत पर लागू करने का व्यवहार में अर्थ होता है कि हम उस भूमि के टुकड़े को कानूनन नहीं मानते, जहां वह एक निश्चित आकार से कम की हो। यह दावा किया जाता है कि भूमि के टुकड़े को मानने से अब इंकार करने से चकबंदी वाली जोत का उप - विभाजन रुक जाएगा। भूमि का उप - विभाजन कई कारणों से हो सकता है और इसके लागू करने के मौके को देखते हुए जोत लाभकारी या अलाभकारी हो सकती है। जैसा कि श्री कीटिंग चाहते हैं, यदि किसी भी प्रकार से उप - विभाजन न होने दिया जाए, तो उससे जमीन की कीमत में तेजी से ह्रास