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भारत में छोटी जोतों की समस्या और उसका निवारण 257

यदि हम इन फालतू श्रमिकों को उत्पादन की गैर - कृषि प्रणालियों में लगा सकें तो हम एक बार में ही कृषि पर से दबाव कम कर सकेंगे और भूमि पर जो इतना अधिक महत्व दिया जाता है, वह भी कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त जब ये श्रमिक उत्पादन की गैर - कृषि प्रणालियों में लग जाएंगे, तो आज की तरह से दूसरे के सहारे अपना पेट नहीं भरेंगे और वे न केवल कमाएंगे, बल्कि हमें सरप्लस उत्पादन भी देंगे, तथा अधिक सरप्लस का मतलब अधिक पूंजी होगा। संक्षेप में, चाहे यह विचित्र लगे, भारत की कृषि संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए सबसे जोरदार उपाय उसका औद्योगीकरण है। औद्योगीकरण का संपूर्ण प्रभाव यह पड़ेगा कि जमीन पर दबाव कम होगा और पूंजी तथा पूंजीगत सामान बढ़ने से जोतों का आकार बढ़ाने की आर्थिक आवश्यकता पैदा हो जाएगी। केवल इतना ही नहीं, औद्योगीकरण भूमि का महत्व कम कर देगा और इसलिए उसके उप - विभाजन और विखंडीकरण के कम अवसर मिलेंगे। औद्योगीकरण एक स्वाभाविक और जोरदार उपाय है और उसे ऊपर बताए गए अविचारित उपायों के मुकाबले तरजीह दी जानी चाहिए। कानून बनाकर हम तो दिखावटी लाभकारी जोतें बना सकेंगे, उसमें कई बुराइयां निहित हैं, परन्तु औद्योगीकरण से लाभ की दृष्टि से बड़े आकार की लाभकारी जोत स्वयं सामने आ जाएगी।

जोतां का आकार, बड़ा करने, चकबंदी करने और चकबंदी वाली जोतों का आकार बरकार रखने का हमारा उपाय है-हम औद्योगीकरण की प्रतिवर्त (रिफ्लेक्स इफैक्ट्स) क्रिया के प्रभावों द्वारा कृषि की इस समस्या का उपचार करना चाहते हैं। इसे कोई काल्पनिक या हवाई न समझें, इसके लिए हम अपने विचार के समर्थन में निम्नलिखित तर्क देना चाहते हैं। औद्योगीकरण की प्रतिवर्त क्रिया के प्रभावों से कृषि में किस प्रकार सुधार आता है, इसका 1883 में संयुक्त राज्य अमरीका में अध्ययन किया गया था। लंदन टाइम्स में इसका जो सार छपा था, उसे हम विस्तृत रूप में उद्धृत कर रहे हैं :

संयुक्त राज्य अमरीका के कृषि विभाग के सांख्यिक ने हाल ही में एक रिपोर्ट में

बताया है कि खेती की भूमि का मूल्य ठीक उसी अनुपात में घट जाता है, जितना

की कृषि का अनुपात अन्य उद्योगों के मुकाबले बढ़ जाता है। अर्थात् जहां सारे

श्रमिक खेती पर निर्भर होते हैं, वहां जमीन का मूल्य कम होता है, अपेक्षाकृत

उसके जहां केवल आधे लोग कृषि पर निर्भर होते हैं, और जहां केवल एक चौथाई

लोग कृषि पर निर्भर होते हैं तो उनकी पैदावार और उनके खेतों का मूल्य और

भी अधिक होता है। वास्तव में, आंकड़ों से यह सिद्ध हो चुका है कि विविध प्रकार

के उद्योग सरकार के लिए बहुत मूल्यावान होते हैं, और किसी फार्म के निकट

किसी कारखाने के होने से खेत का और उस पर होने वाली फसलों का मूल्य

बढ़ जाता है। यह भी सिद्ध हो चुका है कि सं. राज्य अमरीका को यदि चार भागों